दाल-चावल या बिरयानी, जानें आपकी प्लेट से संकट में है क्लाइमेट, समझिए कैसे

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आपके घर की डायनिंग टेबल पर अगर सजी दाल-चावल की थाली हो या किसी भी बड़े रेस्टोरेंट के डायनिंग हॉल में ही टशन मारती हुई बिरयानी की हांडी।

फिर अगर कोई ये कहे कि भूख मिटाने और उम्दा जायके के शिखर पर ले जाने वाला ये लजीज भोजन ही ग्लोबल वार्मिंग की भी वजह बन रहा है।

लेकिन एक नई स्टडी से पता चला है कि भारत के धान के खेत जमकर मीथेन गैस भी छोड़ रहे हैं।

और ये मीथेन (CH₄) कार्बन डाइऑक्साइड के बाद ही ग्लोबल वार्मिंग में योगदान देने वाली ही दूसरी सबसे बड़ी गैस भी मानी जाती है।

फिर दुनिया में औद्योगिक क्रांति के बाद से ही अब तक हुई ग्लोबल वार्मिंग में अकेले मीथेन की हिस्सेदारी भी लगभग 30% है।

फिर धान के खेतों से मीथेन के उत्सर्जन से जुड़ी ये स्टडी की है। और फिर ये रिसर्च ‘एनवायर्नमेंटल रिसर्च लेटर्स’ में छपी है।

जिसमें ये भी कहा गया है कि भारत के धान के खेत करीब 9.7 मिलियन टन मीथेन गैस छोड़ते हैं। और फिर यह आंकड़ा पहले के अनुमानों से कहीं ज्यादा भी है।

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