नगर निगम में अब सामने आए 600 करोड़ रुपये के टेंडर और फर्म घोटाले के मुख्य आरोपी ठेकेदार गोविंद शर्मा से ही रविवार को पुलिस की एसआईटी ने स्वरूपनगर थाने में जब डेढ़ घंटे तक पूछताछ की।
और दूसरी बार बयान दर्ज कराने पहुंचे आरोपी से एसआईटी ने 40 से अधिक सवाल भी किए।
फिर सूत्रों के अनुसार इस दौरान गोविंद ने पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन पर वसूली का आरोप लगा एक बार फिर से ही उंगली उठाई।
ये भी बताया टेंडर लेने के लिए पार्षद से लेकर मुख्य अभियंता तक को 40 प्रतिशत कमीशन देना होता है। और अधिकतम विकास कार्य पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े पार्षदों के इलाकों में ही होते थे।
फिर अगर कोई निर्माणाधीन सड़क दो वार्डों से गुजर रही है तो दोनों पार्षद एनओसी तभी देते थे जब एसोसिएशन के जरिये रकम पहुंचा दी जाती थी।
और गोविंद ने कई भ्रष्ट पार्षदों और प्रतिष्ठित लोगों के नाम भी लिए हैं जो पूरे सिंडिकेट से ही जुड़े हैं। और उसने खुद को निर्दोष बताते हुए कहा कि नगर निगम में बिना घूस दिए कोई काम नहीं होता।
इसके अलावा पार्षद से लेकर मुख्य अभियंता तक कुल टेंडर का 40 प्रतिशत बंटता है। और 20 प्रतिशत ठेकेदार लेता है, बची रकम से काम किया जाता है।
और वहीं, हॉट मिक्स प्लांट बैंक डिटेल से संबंधित जरूरी दस्तावेज वह इस बार भी साथ नहीं लाया।
फिर एसआईटी से बोला अभी मैं पारिवारिक समस्याओं में उलझा हूं। पत्नी बीमार है। और एसआईटी ने उसे तीन दिन की मोहलत देते हुए सभी दस्तावेज साथ लेकर आने के लिए कहा।
और वहीँ गोविंद शर्मा की ओर से पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन पर उंगली उठाने ही पार्षद वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य इससे पल्ला भी झाड़ चुके हैं।
फिर इतना ही नहीं टेंडर प्रक्रिया में वसूली और धांधली के आरोपी ठेकेदारों के सिंडिकेट का सरगना गोविंद शर्मा कानपुर, आगरा और राजस्थान के धौलपुर में फर्म बनाकर ठेकेदारी भी करता है।
और एसआईटी ने टेंडर मिलने के लिए लगने वाले कागजात, बैंक अकाउंट की डिटेल, ट्रांजेक्शन, हैसियत प्रमाण पत्र सहित कई दस्तावेज भी मांगे थे।
फिर गोविंद रविवार को उन्हें लेकर नहीं आया। ये भी बताया कि कुछ दस्तावेज नगर निगम में जमा हैं। बाकी दूसरे घर में रखे हैं। जल्द ही अब सभी दस्तावेज दिखा देगा।