एमपी हाई कोर्ट ने अब भर्तियों में बदलाव को लेकर, जानें क्या दिया आदेश

0
48

ओबीसी आरक्षण को लेकर अब एमपी हाई कोर्ट की तरफ से बड़ा फैसला लिया गया है। और ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण देने से ही हाई कोर्ट ने इनकार भी कर दिया है।

और एमपी में ओबीसी का आरक्षण 14 फीसदी ही रहेगा। फिर 27 फीसदी आरक्षण वाली सभी याचिकाओं को हाई कोर्ट ने खारिज भी कर दिया है।

फिर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद पाठक और विनय सराफ की डबल बेंच की तरफ से ही ये फैसला सुनाया भी गया है।

और हाई कोर्ट कि तरफ से 159 पेज का आदेश भी जारी किया गया है। फिर कोर्ट ने कहा, पूरे केस में ऐसा कोई असामान्य और आपात स्थिति नहीं है जिसमें आरक्षण की 50 फ़ीसदी की सीमा को पार भी किया जाए।

साथ ही कोर्ट ने कहा 2-9-2019 से 29-9-2022 तक 27 फीसदी के हिसाब से ही हुई भर्तियों को सुरक्षित रखने के आदेश होल्ड भी रखे गए।

और 13% पदों को अनारक्षित वर्ग से भी भर जाएं। फिर प्रदेश सरकार को तीन महीने में इस प्रक्रिया को पूरा भी करना होगा।

और हाई कोर्ट के आदेश के बाद मध्य प्रदेश के महाधिवक्ता ने ये भी कहा, केस की सुनवाई के दौरान ही कोर्ट ने दस्तावेजों, सारणी और सांख्यिकी का परीक्षण भी किया गया। और कोर्ट के विस्तृत आदेश का अध्ययन के साथ ही समीक्षा भी कर रहे हैं।

फिर इस बीच, कांग्रेस की मध्यप्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ये कहा कि उनकी पार्टी 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के लिए संघर्ष लगातार जारी रखेगी और हाई कोर्ट के फैसले को ही सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।

फिर उन्होंने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव पर ओबीसी वर्ग के खिलाफ साजिश करने का मुख्य आरोप भी लगाया।

फिर इतना ही नहीं ओबीसी महासभा ने भी फैसले पर निराशा भी जताई।और संगठन की राष्ट्रीय कोर कमेटी के सदस्य एवं मामले में याचिकाकर्ता को लोकेंद्र गुर्जर ने ये कहा।

 महासभा फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी और ओबीसी वर्ग के अधिकारों की ही रक्षा के लिए प्रदेशव्यापी आंदोलन भी शुरू करेगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here