आज सुबह शुरुआती कारोबार में तेल की कीमतों में गिरावट थी, लेकिन बाद में अचानक तेजी आ गई।
और सुबह 7 :50 बजे ब्रेंट क्रूड 110.37 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। और वहीं अमेरिकी कच्चे तेल डब्ल्यूटीआई की कीमत 99.17 डॉलर प्रति बैरल रही।
फिर तेल के दाम में आई ये तेजी दो बड़ी वजहों से है। एक तरफ खाड़ी देशों में हमलों की खबरें आ रही हैं, तो दूसरी तरफ रूसी तेल की सप्लाई पर अमेरिका का फैसला अटका हुआ है।
और वही गोल्डमैन सैक्स रिसर्च का कहना है कि अगले एक साल में कच्चे तेल के दाम धीरे-धीरे गिर सकते हैं, क्योंकि मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में सुधार होने की उम्मीद भी शामिल है।
साथ ही तेल की कीमतों को प्रभावित करने वाला एक बड़ा मुद्दा रूस से जुड़ा है। और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीते शुक्रवार रात एक आदेश जारी किया था, जिसमें रूस से जुड़े कुछ प्रतिबंधों समेत शुल्कों में राहत देने की बात भी थी।
और इसमें रूसी सामान पर लगने वाले टैक्स के अलावा रूसी तेल-गैस खरीदने वाले देशों पर लगने वाले जुर्माने में राहत जैसे कदम भी शामिल थे।
हालांकि ट्रंप ने अगले ही दिन यानी शनिवार को साफ किया कि इस मामले में अभी आखिरी फैसला बिल्कुल भी नहीं हुआ है।
और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा कि हालात को समझने के लिए अभी वक्त भी चाहिए।
फिर अब बाजार ये समझना चाहता है कि रूसी तेल की सप्लाई पर आगे क्या असर पड़ेगा।
और अगर रूसी तेल आसानी से मिलता है, तो कीमतों को राहत भी मिलेगी। फिर वहीं उलझन बनी रहने पर बाजार में उतार-चढ़ाव भी जारी रहेगा।
और अब इस संकट के बीच हाल ही में गोल्डमैन सैक्स रिसर्च ने आगे का अनुमान जारी किया है।
और फिर रिपोर्ट के मुताबिक अगले एक साल में कच्चे तेल के दाम धीरे-धीरे गिर सकते हैं, क्योंकि मिडिल ईस्ट से तेल की सप्लाई में सुधार होने की पूर्ण उम्मीद है।
फिर पहले बैंक ने इसके 85 डॉलर रहने का अनुमान लगाया था। और अब वहीं साल 2027 के लिए ब्रेंट क्रूड की औसत कीमत 80 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है।
फिर सप्लाई सुधरने से कीमतों में नरमी भी आ सकती है। लेकिन अगर अमेरिका, इजरायल या ईरान के बीच तनाव दोबारा बढ़ता है, तो तेल लंबे समय तक महंगा भी रह सकता है, जिससे दुनियाभर के बाजारों पर दबाव भी पड़ेगा।