कैंसर के इलाज में अब इस्तेमाल होने वाली महंगी दवाएं जल्द ही सस्ती हो सकती हैं। और फिर केंद्र सरकार पर इन दवाओं पर ट्रेड मार्जिन अधिकतम 30 प्रतिशत तक सीमित करने की तैयारी भी कर रही है।
और फिर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हलफनामे में ये भी बताया है कि इस कदम से कैंसर की दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य में 20 से 70 प्रतिशत तक की कमी भी आ सकती है।
इसका मकसद दवाओं की कीमतों पर कंट्रोल, मरीजों के जेब से होने वाले खर्च में कमी और इलाज को किफायती भी बनाना है।
और फिर समिति को कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाली उन दवाओं की सूची तैयार करने की पूर्ण जिम्मेदारी भी दी गई है।
जिन पर ट्रेड मार्जिन की सीमा लागू की जाएगी। और उसे 10 से 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने को भी कहा गया है। और फिर रिपोर्ट मिलने के बाद ही NPPA आवश्यक निर्देश जारी करने पर विचार भी करेगा।
फिर सरकार का अनुमान है कि प्रस्तावित व्यवस्था लागू होने पर कैंसर की दवाओं के MRP में ही करीब 20 से 70 प्रतिशत तक कमी भी आ सकती है।
और इससे कैंसर के मरीजों और उनके परिवारों को इलाज के दौरान ही होने वाले खर्च में राहत मिलने की पूर्ण उम्मीद है।
फिर ट्रेड मार्जिन की सीमा तय करने का उद्देश्य दवा की खरीद और बिक्री के बीच होने वाले मुनाफे को नियंत्रित भी करना है।
फिर सरकार ने दवाओं की आपूर्ति और वितरण व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ही ट्रेड चैनल के लिए 30 प्रतिशत मार्जिन का प्रावधान करने की बात भी कही है।
फिर इसके अलावा फरवरी 2019 में NPPA ने 42 चुनिंदा गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर ट्रेड मार्जिन 30 प्रतिशत तक सीमित भी किया था।
और सरकार के मुताबिक, उस फैसले के बाद ही 526 ब्रांडों के अधिकतम खुदरा मूल्य में कमी भी आई थी।
और फिर कंपनियों से मिले आंकड़ों के आधार पर ही मरीजों को सालाना करीब 2,984 करोड़ रुपये की बचत होने का पूर्ण अनुमान भी लगाया गया था।