वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर आई भारी तेजी के कारण इस हफ्ते शेयर बाजार लगातार औंधे मुंह गिरा है।
और मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों द्वारा ही की गई भारी बिकवाली के चलते बाजार के दोनों मुख्य सूचकांक बड़े नुकसान के साथ ही बंद हुए हैं।
और फिर बाजार के जानकारों का ये भी कहना है कि मैक्रोइकॉनॉमिक माहौल यानी देश के आर्थिक हालात अभी चुनौतीपूर्ण भी बने हुए हैं।
और भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल बाहर से ही खरीदता है। और ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें ही भारतीय बाजारों के लिए सबसे बड़ी अनिश्चितता और चिंता का कारण भी बन गई हैं।
फिर छुट्टियों के कारण इस छोटे कारोबारी हफ्ते में बाजार पर लगातार दबाव भी देखा गया।
और निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही सूचकांकों में लगातार चार सत्रों से ही गिरावट का सिलसिला भी जारी रहा।
निफ्टी 50: इस हफ्ते निफ्टी में करीब 2.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट भी दर्ज की गई। और लगातार गिरावट के चलते बाजार का शॉर्ट-टर्म टेक्निकल स्ट्रक्चर कमजोर भी हुआ है।
और फिर जानकारों के मुताबिक, अब निफ्टी के लिए 22,800 और 23,000 का स्तर एक मजबूत रुकावट ज़ोन भी बन गया है।
सेंसेक्स: बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स भी अब इस हफ्ते करीब 2.2 प्रतिशत तक टूट गया।
और गिरावट के इस दौर में अब सेंसेक्स के लिए नीचे की तरफ 72,500 से 72,600 का स्तर एक तत्काल सपोर्ट ज़ोन भी माना जा रहा है।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में इस तरह लगातार होने वाली बढ़ोतरी से ही देश में ऊर्जा और माल ढुलाई की लागत और भी बढ़ जाएगी।
फिर इसका सीधा असर आम जनता की खपत पर भी पड़ेगा और सीधे तौर पर ऑयल-सेंसिटिव सेक्टर्स जैसे पेंट, टायर और फिर एविएशन पर दबाव काफी ज्यादा बढ़ भी जाएगा।