विधानसभा चुनाव की दहलीज पर अब खड़े उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के नतीजों ने भाजपा की चुनौती बढ़ा दी है।
फिर पार्टी भले ही दोबारा छह सीटें हासिल करने में सफल रही हो लेकिन सपा की सीटों में बढ़ोत्तरी से भगवा खेमे पर ही मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ गया है।
और पार्टी को विधानसभा चुनाव के लिए रणनीतिक मोर्चे पर अब और अधिक सतर्क होना पड़ेगा।
फिर खुद सीएम योगी के चुनाव की कमान संभालने और आठ जनसभाओं के बाद ही अब इस हालत के पीछे कई कारण मानें जा रहे हैं।
फिर गोरखपुर से आगरा तक भितरघात दिखाई भी दिया है। और छह सीटों पर देरी से टिकट घोषित करना भी भाजपा को भारी पड़ गया है।
फिर इन छह में से चार सीटें पार्टी हार गई जबकि महीनों पहले घोषित पांच प्रत्याशियों में से चार ने जीत हासिल कर ली।
इसके साथ ही जिन 11 सीटों के लिए चुनाव हुए उनमें से भाजपा के पास छह सीटें थीं। और इस बार भी पार्टी के खाते में उतनी ही सीटें आई हैं।
फिर मगर सीटों के नतीजों में हुए उलटफेर ने पार्टी के रणनीतिकारों को नये सिरे से ही व्यूह रचना के लिए मजबूर भी कर दिया है। और राजधानी लखनऊ की जीती हुई स्नातक सीट भाजपा इस बार हार भी गई।
दरअसल इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनाव के रिहर्सल या यूं कहें कि सेमीफाइनल के तौर पर ही देखा जा रहा था। और ऐसे में सत्ताधारी दल कोई जोखिम उठाने को तैयार भी नहीं था।
इसके अलावा इस दौरान बड़े पैमाने पर भाजपा को भितरघात भी झेलना पड़ा। फिर यह सिलसिला आगरा सीट से लेकर प्रयागराज, लखनऊ और गोरखपुर तक देखने को भी मिला।
और प्रतापगढ़ में पार्टी के स्थानीय संगठन ने एक पूर्व मंत्री द्वारा विरोधियों की मदद करने की शिकायत भी की।
फिर नौबत यह रही की प्रतापगढ़ में भाजपा प्रत्याशी को बहुत कम मत मिलने की सूचना है।
और आगरा सीट पर भाजपा से जुड़े कई वित्तविहीन स्कूल संचालकों ने भी सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल का साथ ही दिया।
और पार्टी के कई नेता सिर्फ सोशल मीडिया पर बैठकों के फोटो साझा करने तक ही सीमित भी रहे।
फिर चुनाव से ठीक पहले ही भाजपाई से सपाई हुए संजयन त्रिपाठी और बागी तेवर दिखाने वाले भाजपा के एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह ने भी पार्टी को झटका भी दिया।
और जिससे भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी की जीत का अंतर घटा भी दिया। फिर नतीजों ने साफ कर दिया है।
भाजपा को विधानसभा चुनाव की दृष्टि से खासतौर से प्रबुद्ध वर्ग के बीच ही अपनी बात और मजबूती से पहुंचानी भी होगी।
और दागी चेहरों को बदलने के साथ ही पन्ना प्रमुखों की व्यवस्था को और प्रभावी बनाना होगा।