न्यूज़लिंक हिंदी। शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। आज यानी 16 अक्तूबर को मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाएगी। ये मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप और नौ शक्तियों में से दूसरी शक्ति हैं। मां दुर्गा का यह स्वरूप ज्योर्तिमय है। ब्रह्मा की इच्छाशक्ति और तपस्विनी का आचरण करने वाली मां ब्रह्मचारिणी त्याग की प्रतिमूर्ति हैं। इनकी उपासना से मनुष्य में तप, त्याग, वैराग्य, सदाचार और संयम की वृद्धि होती है। साथ ही कुंडली में मंगल ग्रह से जुड़े सारे दोषों से मुक्ति मिल जाती है। मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने से सभी कार्य पूरे होते हैं, और विजय की प्राप्ति होती है। इसके अलावा जीवन से हर तरह की परेशानियां भी खत्म होती हैं।

मां ब्रह्माचारिणी स्वरूप..
माँ ब्रह्मचारिणी का माता दुर्गा के नौ रूपों में दूसरा स्वरूप माना जाता है। इसलिए ब्रह्मचारिणी देवी को द्वितीय दुर्गा के रूप में पूजा जाता है। नवदुर्गाओं में यही दूसरी दुर्गा हैं। इस स्वरुप में माता ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए बिना अन्न और जल के 5000 वर्षों तक घोर तपस्या की, जिसके कारण माता के इस स्वरुप को ‘ब्रह्मचारिणी’ कहा जाता है।

पूजा करने की विधि..
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा करने के लिए सबसे पहले सुबह उठकर स्नान कर लें. इसके उपरांत पूजा के लिए आसन बिछाएं. इसके बाद आसन पर बैठकर मां की पूजा करें। माता को फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि चढ़ाएं। ब्रह्मचारिणी मां को मिठाई का भोग लगाएं। साथ ही माता को पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें और फिर देवी ब्रह्मचारिणी मां के मंत्रों का जाप करें.
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ब्रह्माचारिणी मंत्र
वन्दे वांच्छितलाभायचन्द्रर्घकृतशेखराम्।
जपमालाकमण्डलुधराब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णास्वाधिष्ठानास्थितांद्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्।
धवल परिधानांब्रह्मरूपांपुष्पालंकारभूषिताम्॥
पद्मवंदनापल्लवाराधराकातंकपोलांपीन पयोधराम्।
कमनीयांलावण्यांस्मेरमुखीनिम्न नाभि नितम्बनीम्॥
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