न्यूज़लिंक हिंदी, मथुरा (बादल शर्मा) । आंकड़े गवाही दे रहे हैं कि धर्म नगरी के लोगों का रुझान दूध पीने की बजाय शराब के सेवन की ओर बढ़ रहा है। शराब की खपत वृद्धि दर में धर्म नगरी ने ताज नगरी को लगातार दो सालों से पीछे छोड़ा हुआ है। सरकारी आंकड़ों में इसके लिए शराब के अवैध कारोबार पर लगाम लगाये जाने को भी बड़ा कारण बताया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि मथुरा जनपद में आठ सक्रिय शराब माफिया चिन्हित किये गये थे जो अब जनपद छोड़ कर जा चुके हैं।

मदिरा के अवैध कारोबार पर रोक लगने से शराब के वैध कारोबार में उछाल आया है। यह सच्चाई हो सकती है लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू यह भी है कि यह देशी और अंग्रेजी शराब के अवैध कारोबार पर यह सख्ती दूसरे जनपदों में भी बरती जा रही है। वहां भी अवैध कारोबार पर रोक लगी है। दुकानों जनपद में 180 देषी की हैं। 207 अंग्रेजी की हैं, 203 बीयर हैं। 47 भांग की हैं। मॉडल शॉप 7 और 6 बार हैं। इस साल सितम्बर महीने में ही पिछली साल की तुलना में 17 प्रतिशत शराब अधिक पी गई है।
ये भी पढ़े : नेपाल में भूकंप के झटको को किया गया महसूस, यूपी- बिहार के सीमावर्ती जिलों से राजधानी तक दिखा असर
यानी सरकार को 17 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त हुआ है। वर्ष 2022 के सितम्बर महीने में शराब बिक्री से सरकार को 41 करोड 29 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ था जो 2023 में बढ कर 48 करोड़ 48 लाख हो गया। यानी कि राजस्व की 17 प्रतिशत अधिक प्राप्ति हुई। इनता ही नहीं आबकारी विभाग को सितंबर महीने में 61.22 करोड़ की राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य दिया गया था जिसके सापेक्ष विभाग 89.97 प्रतिशत लक्ष्य ही हासिल कर सका। तय लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति में सितम्बर माह में मथुरा जनपद मंडल में प्रथम स्थान पर रहा। वहीं प्रदेश भर में आठवें स्थान रहा।
ये भी पढ़े : कनाडा का बड़ा फैसला मुंबई में बंद किया अपना वीजा और काउंसलर एक्सेस
इतना ही नहीं पिछले पूरे वित्तीय वर्ष में मथुरा जनपद मंडल में लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व प्राप्ति में प्रथम स्थान पर रहा था। सितंबर महीने में आबकारी विभाग की ओर से अवैध शराब कारोबारियों के खिलाफ की गई कार्यवाही में कुल 60 अभियोग पंजीकृत किये गये और 19 गिरफ्तारी हुईं। जबकि 7 हजार 102 लीटर अवैध शराब पकडी है और तीन वाहन जब्त किये गये। बावजूद इसके आबकारी विभाग स्टाफ की कमी है जूझ रहा है। जनपद में पांच इंस्पेक्टर, नौ हैड कांस्टेबल और 14 कांस्टेबल तैनात हैं।
अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए तीन टीम प्रतिदिन जनपद के विभिन्न हिस्सों में जाती हैं। अवैध शराब पर जीरो टॉलरेंस की नीति अपना कर काम किया जाता है। इसके फलस्वरूप अवैध शराब पर प्रभावी रूप से रोक लगाने में सफलता प्राप्त हुई है। न कलेव पिछले वित्त वर्ष में बल्कि इस वित्तीय वर्ष में भी वैध मदिरा के उपयोग वृद्धि दर में मथुरा जनपद आगरा मंडल में प्रथम स्थान पर चल रहा है।
-कुमार प्रभात चंद, जिला आबकारी अधिकारी

