न्यूज़लिंक हिंदी, डेस्क। इटावा के जसवंतनगर में 164 वर्ष पुरानी अंतरराष्ट्रीय गौरव प्राप्त मैदानी रामलीला है। जो मंच पर नहीं शहर की सड़कों पर होती है। यहाँ बुलेट पर सवार रावण जब आगे-आगे चलता है तो भगवान श्रीराम के स्वरूप में कलाकार उसे बग्घी से दौड़ाकर रावण का वध करते हैं। यह परंपरा हमेशा से चली आ रही है। इस रामलीला का मंचन देखने दूर दूर से लोग आते हैं।

रविवार को नगर की सड़कों पर राम लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध, सेतु निर्माण,अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण शक्ति का मनोमुग्धकारी लीलाओ का प्रदर्शन स्थानीय कलाकारों के द्वारा किया गया। रामलीला देखने के लिए देर रात तक लोगों की भीड़ जमा रही। रविवार को मेघनाथ युद्ध में सफलता के लिए यहां की त्रिगमा केला देवी माता मंदिर पर पूजा अर्चन कर आशीर्वाद लिया फिर अपने दलबल के साथ नरसिंह मंदिर पहुंचा जहां राम दल से सामना होने पर युद्ध छिड गया गया। नगर की सड़कों पर घमासान चले युद्ध के बाद दोनों दल युद्ध करते हुए रामलीला मैदान पहुंचे।

मैदानी लीला की शुरुआत श्री राम ने लंका पर चढ़ाई करने से पहले समुद्र तट पर अपनी आराध्य महादेव शंकर भगवान के शिवलिंग की पूजा कर स्थापना की। बानरी सेना ने नल-नील के सहयोग से लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र पर सेतु बनाया।

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समिति के कार्यकारी अध्यक्ष हीरालाल गुप्ता, प्रबंधक राजीव गुप्ता बबलू, उप प्रबंधक संयोजक अजेंद्र सिंह गौर, राजीव माथुर रतन पांडे, निखिल गुप्ता, प्रभाकर दुबे, विशाल गुप्ता के निर्देशन में सफलतापूर्वक संपन्न हुई। भारी भीड़ को देखते हुए पुलिस की समुचित व्यवस्था भी रहती है।

