भारत के मशहूर बिजनेसमैन पर कुत्तों ने किया हमला, 49 साल के उम्र में हुआ निधन

भारत के मशहूर बिजनेसमैन और बाघ बकरी चाय के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और मालिक पराग देसाई का 49 साल के उम्र में निधन हो गया है। जानकारी के मुताबिक, पराग देसाई का इलाज के दौरान अस्पताल में निधन हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पराग देसाई देसाई 15 अक्टूबर को उस समय दुर्घटना का शिकार हो गए थे जब वह अपने घर के पास सुबह सैर पर निकले थे।

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न्यूज़लिंक हिंदी। भारत के मशहूर बिजनेसमैन और बाघ बकरी चाय के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और मालिक पराग देसाई का 49 साल के उम्र में निधन हो गया है। जानकारी के मुताबिक, पराग देसाई का इलाज के दौरान अस्पताल में निधन हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पराग देसाई देसाई 15 अक्टूबर को उस समय दुर्घटना का शिकार हो गए थे जब वह अपने घर के पास सुबह सैर पर निकले थे। इसके बाद उन्हें अस्पताल में एडमिट कराया गया और रविवार देर शाम को उनका निधन हो गया।

मॉर्निंग वॉक के दौरान हुए थे घायल
दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पराग देसाई 15 अक्टूबर को सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले थे, जहां उनपर एक स्ट्रीट डॉग्स ने हमला कर दिया था, उनसे बचने की कोशिश में पराग देसाई अपने घर के बाहर फिसलकर गिर गए थे, जिसके बाद उनके सिर पर गंभीर चोटें आई थीं। और रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्हें ब्रेन हेमरेज हो गया था। घायल होने के बाद उन्हें पास के ही अस्पताल में एडमिट कराया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें एक निजी अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया। देसाई के परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, उनकी तुरंत सर्जरी की गई और निधन से पहले उन्हें सात दिनों तक वेंटिलेटर पर रखा गया था। लेकिन रविवार देर शाम को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

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वाघ बकरी चाय के डायरेक्टर थे पराग देसाई
पराग देसाई वाघ बकरी चाय कंपनी के 6 ग्रुप ऑफ डायरेक्टर्स में से एक थे। वह कंपनी में एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की पोस्ट पर थे। इसके साथ ही इनकी पढ़ाई की बात करे तो उन्होंने अमेरिका की लॉन्ग आइडैंड यूनिवर्सिटी से एमबीए किया था। वह वाघ बकरी के लिए मार्केटिंग, सेल्स और एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट का काम देखते थे। वह CII का भी हिस्सा रहे हैं। इसके साथ ही पराग देसाई एक टी टेस्टर एक्सपर्ट भी थे।

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वाघ-बकरी चाय की शुरुआत कैसे हुई?
वाघ-बकरी चाय नाम कैसे पड़ा? इसके पीछे सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ाई का इतिहास है। एक लेख के अनुसार, गुजराती में बाघ को ‘वाघ’ कहते हैं और बकरी यानी बकरी। ये चिह्न एकता और सौहार्द का प्रतीक है। इस चिह्न में बाघ यानी उच्च वर्ग के लोग और बकरी यानी निम्न वर्ग के लोग। दोनों को एकसाथ चाय पीते दिखाना लोगों के लिए एक बहुत बड़ा संदेश है। गुजरात भर में सफलता पाने के बाद, अगले कुछ वर्षों में कंपनी ने देशभर में विस्तार करना शुरू कर दिया। 2003 से 2009 के बीच, ब्रांड का कई राज्यों जैसे महाराष्ट्र, राजस्थान, यूपी में विस्तार हुआ। आज यह पूरे भारत में घर-घर का नाम बन गया।

इसके साथ ही कंपनी के टर्नओवर की बात करे तो , वाघ बकरी चाय ग्रुप, अपनी प्रीमियम चाय के लिए फेमस है। Parag Desai साल 1995 में वाघ बकरी चाय के साथ जुड़े थे। उस दौरान कंपनी का कुल कारोबार 100 करोड़ रुपये से भी कम था। लेकिन आज के समय में कंपनी का सालाना टर्न ओवर 2000 करोड़ रुपये को पार कर चुका है। भारत के 24 राज्यों के साथ-साथ दुनिया के 60 देशों वाघ बकरी चाय को EXPORT किया जा रहा है, ये देसाई का ही प्लान था, जिसकी वजह से कंपनी की ब्रांडिंग मजबूत हुई। ब्रांड का यूनिक नाम होने की वजह से भी लोग इस प्रोडक्ट से कनेक्ट हुए।

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