Karwa Chauth 2023: किसने किया था सबसे पहले करवा चौथ का व्रत, जानिए कैसे शुरू हुई परंपरा

सा मन जाता है की इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत करती हैं। हालांकि सामाजिक मान्यताओं में इस व्रत से जुडी कई धार्मिक कथाएं है। तो चलिए आज जानते है करवा चौथ से जुडी कुछ रोचक कथाओं के बारे में...

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न्यूज़लिंक हिंदी मथुरा। हिन्दू धर्म में वैसे तो पूरे साल हर तरह के तीज त्यौहार मनाये जाते है। जिनमे से एक आता है करवा चौथ का व्रत। करवा चौथ का हिंदू धर्म में काफी महत्व है। करवा चौथ का व्रत भारतीय महिलाओं के लिए सबसे जरुरी व्रतों में से एक है। ऐसा मन जाता है की इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र की कामना के लिए व्रत करती हैं। हालांकि सामाजिक मान्यताओं में इस व्रत से जुडी कई धार्मिक कथाएं है। तो चलिए आज जानते है करवा चौथ से जुडी कुछ रोचक कथाओं के बारे में…

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सामाजिक मान्यताएं ये भी कहती हैं कि इस व्रत का चलन पंजाबी परंपराओं से लिया गया है। लेकिन इस व्रत से जुड़ी धार्मिक कथाएं कुछ और ही कहती हैं। कई कथाओं में तो करवा चौथ को करवा नाम की एक स्त्री से जोड़कर देखा जाता है। कहा जाता है कि मगरमच्छ से अपने पति की जान बचाने के लिए और भगवान चित्रगुप्त से अपने पति के लिए लंबी आयु का वरदान प्राप्त करने के कारण से ही यह करवा चौथ नाम रखा जाता है।

करवा चौथ मनाने की वजह
धार्मिक कथाओं में कहा जाता है कि प्राचीन समय में करवा नाम की एक औरत थी। वह अपने पति के साथ नदी किनारे बसे एक गांव में रहती थी। एक दिन उसका पति नदी में स्नान करने गया। नदी में नहाते समय एक मगरमच्छ ने उसका पैर पकड़ लिया और निगलने के लिए उसे अपनी तरफ खींचने लगा। इस पर वह अपनी पत्नी का नाम लेकर चिल्लाकर अपनी मदद के लिए बुलाने लगा। जिसके बाद पति की आवाज सुन्न कर वो उसकी मदद के लिए आयी और उसको मौत के मुह से बचा लायी।

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भगवान चित्रगुप्त ने दिया था व्रत का वरदान
इसके बाद करवा का अपने पति के जीवन की इस तरह से रक्षा करने के कारण भगवान चित्रगुप्त ने खुश होकर करवा को यह वरदान भी दिया था कि इस तिथि पर जो भी महिला पूरे विश्वास और आस्था से व्रत और पूजा करेगी, मैं उसके सौभाग्य की रक्षा करूंगा।

इस कारण पड़ा करवा चौथ नाम
उस दिन कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि होने के कारण करवा और चौथ के मिलने से इस व्रत का नाम करवा चौथ पड़ा था। इस तरह मां करवा वह पहली महिला हैं, जिन्होंने अपने सुहाग की रक्षा के इस व्रत को न केवल पहली बार किया बल्कि इसकी शुरुआत भी की थी। इस व्रत के बारे में यह भी कहा जाता है कि भगवान श्रीकृष्ण जी के कहने पर द्रौपदी ने अर्जुन के लिए करवा चौथ का व्रत रखा था। इसके साथ ही इस व्रत का उल्लेख वराह पुराण में भी मिलता है।

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