न्यूज़लिंक हिंदी, कानपुर। नगर निगम में भ्रष्टाचार चरम पर है। यहां अधिकारी आखों में धूल झोकने पर अमादा है। बुधवार को नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन ने गुजैनी में एक ऐसा कार्य होते हुए पकड़ा, जिसको कागजों में स्वीकृति ही नहीं दी गई थी। लेकिन, अधिकारियों ने ठेकेदार के साथ मिलकर 80 फीसदी से ज्यादा कार्य करा दिया। नगर आयुक्त ने जब यह पकड़ा तो उन्होंने इस कार्य को श्रमदान घोषित कर दिया।
नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन ने बताया कि जोन-05 वार्ड के अन्तर्गत गुजैनी में मकान संख्या 45 से मकान संख्या-128 तक एचएमपी द्वारा सड़क निर्माण व मकान संख्या 82 के पास इंटर लाकिंग का कार्य प्रस्तावित था। यह कार्य 994649 से होना था। उन्होंने बुधवार को निरीक्षण में पाया कि यहां लगभग 80 प्रतिशत कार्य पूरा करा लिया गया है।
ये भी पढ़ें : Manipur : मुख्यमंत्री आवास के पास थाने पर भीड़ ने किया हमला ,‘हमें हथियार दो, हम बदला लेंगे’,
जबकि इस कार्य से सम्बन्धित पत्रावली की जांच करने के बाद पाया गया कि यह कार्य न ही निविदा प्रक्रिया में है और न ही इसकी वित्तीय एवं प्रशासनीय स्वीकृति दी गई। संबंधित अधिकारियों ने कार्य को मनमानी तरीके बगैर अधिकारियो के संज्ञान में करा दिया। यह कार्य मेसर्स आईजे टाइल्स द्वारा बिना किसी अनुमति के किया गया।
अवर अभियन्ता पर लटकी तलवार
नगर आयुक्त ने प्रथम दृष्टया कार्य को श्रमदान घोषित कर दिया गया। यह नगर निगम का एतिहासिक फैसला कहा जा रहा है। इसके साथ ही बिना अनुमति संदर्भित स्थल पर कार्य कराये जाने के सम्बन्धित अवर अभियन्ता अखिलेश कुमार यादव के विरूद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही के लिए शासन में संस्तुति भी कर दी।

