न्यूज़लिंक हिंदी। कोर्ट में कई बार बेहद अजीबो-गरीब याचिकाएं दाखिल की जाती हैं। ऐसी ही एक याचिका के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं, जिसे सुनकर यकीनन आप भी सोचने पर मजबूर हो जाएंगे। जहां एक महिला ने बच्चा पैदा करने के लिए कोर्ट में याचिका देकर अपने पति को रिहा करने की मांग की है।
ये मामला मध्य प्रदेश के जबलपुर का है। जहा एक महिला बच्चा पैदा कर मां बनना चाहती है। महिला का कहना है कि मां बनना उसका मौलिक अधिकार है। लेकिन महिला का पति जेल में बंद है। इसके लिए महिला ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर पति को रिहा करने की गुहार लगाई है। महिला की याचिका पर न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल की एकल पीठ ने सुनवाई की। इस दौरान कोर्ट ने जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज के डीन को पांच डॉक्टरों की टीम गठित करने का निर्देश दिया। ताकि महिला की जांच कर पता लगाया जा सके कि वो गर्भधारण करने के लिए मेडिकल रूप से फिट है या नहीं।
सरकारी वकील ने कहा- ये मां नहीं बन सकती
आवेदक महिला ने अपनी याचिका के समर्थन में रेखा बनाम राजस्थान सरकार 2022 मामले में राजस्थान हाई कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया। इस केस में हाई कोर्ट की एक खंडपीठ ने संतान प्राप्ति के लिए आजीवन कारावास की सजा प्राप्त कैदी को 15 दिन की पैरोल दी थी। राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने महिला की इस याचिका का विरोध करते हुए दावा किया कि वह रजोनिवृत्ति की उम्र पार कर चुकी है। इसलिए प्राकृतिक रूप से या कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से गर्भ धारण की कोई संभावना नहीं है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद जस्टिस विवेक अग्रवाल ने जबलपुर मेडिकल कॉलेज की डीन को पांच डॉक्टरों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया, जिसमें तीन स्त्री रोग विशेषज्ञ, एक मनोचिकित्सक और दूसरा एंडोक्रिनोलॉजिस्ट है। यह टीम याचिकाकर्ता महिला की जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि क्या वह गर्भ धारण कर सकती है। ये टीम अपनी रिपोर्ट 15 दिन के भीतर देगी।

