Air Polluction: सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा- ‘बुलडोजर शुरू कर दिया तो रुकने वाला नही

अदालत ने कहा कि यह सबका फर्ज बनता है कि वह खासतौर से त्योहारों के समय प्रदूषण कम करने का प्रयास करे।

0
224

न्यूज़लिंक हिंदी। दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण से हर कोई चिंतित है, त्योहारों के मौके पर यहां पटाखे की खरीद-बिक्री व जलाने को लेकर दायर याचिकाओं पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई कर रहा है जिसमें कोर्ट ने कई सख्त टिप्पणियां की हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को फटकार लगाते हुए कहा कि प्रदूषण को लेकर कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं है। हर कोई मामले को टालने पर लगा है। पराली हर हाल में जलनी बंद हो।

पटाखे जलाने और खरीद-बिक्री वाली याचिका पर हुई ये सुनवाई 

 1 अदालत ने प्रदूषण कम करने के लिए राजस्थान सरकार को भी निर्देश दिए। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान को निर्देश दिए कि वह सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेश का पालन करें और त्योहार के समय पटाखे न जलाएं। अदालत ने कहा कि यह सबका फर्ज बनता है कि वह खासतौर से त्योहारों के समय प्रदूषण कम करने का प्रयास करे।

पटाखों की बिक्री-खरीद और इस्तेमाल वाली याचिका पर अदालत में सुनवाई शुरू हुई तो याचिकाकर्ता ने कहा कि, यह राजस्थान को लेकर है। ऐसा लगता है कि पटाखे जलाने और इसकी खरीद-बिक्री पर रोक सिर्फ दिल्ली-एनसीआर के लिए है, जबकि यह पूरे देश के लिए है।

ये भी पढ़ें : दिल्ली सरकार ने किया बड़ा ऐलान, दिवाली से पहले मिलेगा कर्मचारियों को बोनस

3  याचिकाकर्ता ने आगे कहा कि हम कुछ नया नहीं मांग रहे हैं। हम सिर्फ ये चाहते हैं कि पुराने आदेश का पालन हो।

 4  इस पर राजस्थान पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के वकील ने कहा, राजस्थान में प्रदूषण में मामूली वृद्धि हुई है।

याचिकाकर्ता ने एक समय निर्धारित करने और स्कूल-अस्पताल जैसी जगहों से दूर पटाखे जलाने के निर्देश देने की मांग की।

अदालत ने कहा, इसके लिए कोई अलग निर्देश देने की जरूरत नहीं है। हमारे पुराने आदेशों का ही पालन हो। सुनवाई के अंत में जस्टिस बोपन्ना ने सबको हैप्पी और सुरक्षित दीपावली कहा।

प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ

1  मामले की सुनवाई के दौरान सीनियर वकील अपराजिता सिंह ने सीनियर आईआईटी-कानपुर की एक स्टडी को पेश किया जो बताते हैं कि प्रदूषण के क्या स्रोत हैं।

2  वकील अपराजिता ने कहा सीएक्यूएम ने रिपोर्ट दी है कि सबकुछ ठीक है। सीएक्यूएम ने रिपोर्ट दी है कि हम शून्य पराली जलाने की आशा में है… आज राज्यों के पास कोई बहाना नहीं है। अगर वो कहते हैं कि उनके पास पराली जलने को ट्रैक करने के लिए कोई एप है।

 3  इस पर जस्टिस कौल ने कहा, समाधान क्या है? दिल्ली को इस तरह घुटने के लिए नहीं छोड़ा जा सकता।

4  इस पर सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, यह बहुत जरूरी वैधानिक बैकग्राउंड है जिसे बताना जरूरी है, पराली का जलना समस्या नहीं है। समस्या ये है कि यह कब बंद होगा और कितने देशों में पराली जलती है।

 5  जस्टिस कौल ने वकीलों से कहा आप देखिए कितने बच्चे दिल्ली में स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं।

6  इस पर पंजाब के एजी ने कहा कि मैं चाहता हूं कि पंजाब इस मामले में विकासशील समाधान लाए। जस्टिस कौल ने कहा, पराली प्रदूषण का बड़ा कारक है… फिर उन्होंने पूछा दिल्ली सरकार का प्रतिनिधि कहां है… और दिल्ली सरकार राजधानी में आने वाले वाहनों का क्या कर रही है?

ये भी पढ़ें : Israel-Hamas War: इजराइल और हमास युद्ध के एक महीने बीते, PM नेतन्याहू बोले- युद्ध रोकने पर करूंगा विचार

7  पंजाब के एजी ने ये भी कहा कि हमें किसानों को एमएसपी देनी होगी ताकि वह अन्य फसलों को भी उगाएं। इस पर जस्टिस कौल ने कहा, कुछ न कुछ तो जल्द करना ही होगा। वह आगे बोले, फसल का समय ही समस्या है… जब तक किसान दूसरी फसलों पर शिफ्ट नहीं होते… तब तक के लिए इस समस्या से निपटना ही होगा।

8  जस्टिस कौल ने केंद्र से भी कहा कि आपको किसानों की मदद करनी होगी ताकि वह दूसरी फसलों पर शिफ्ट हो जाएं। जज आगे बोले, हम नहीं जानते आप अपने सभी अफसरों को लगाएं, हमें इस पर जरा भी धैर्य नहीं है। जज ने ये भी कहा कि आप जानते हैं कि अगर मैंने बुलडोजर शुरू कर दिया तो रुकने वाला नहीं हूं।

 9  सीनियर वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा कि पहली बार हमारे पास पंजाब का वकील है और वह निष्पक्ष हैं। इस पर जस्टिस कौल ने सहमति जताई।

 10  फिर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार तक टाल दी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here