घूसखोर पंडत’ के डायरेक्टर और टीम के ख़िलाफ़ अब लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में एफ़आईआर दर्ज की गई है।
और फिर लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट की ओर से शुक्रवार को जारी किए गए प्रेस नोट में इसकी जानकारी भी दी गई है।
इसके साथ ही प्रेस नोट में इस फ़िल्म पर जातिगत अपमान, सामाजिक आक्रोश और शांति भंग करने की कोशिश का आरोप भी लगाया गया है।
और फिर इसमें ये भी कहा गया, इसका शीर्षक एक विशेष समुदाय/जाति को लक्षित कर अपमानित करने के उद्देश्य से ही खा गया है।
और फिर फ़िल्म के नाम और सामग्री को लेकर ब्राह्मण समाज और कई सामाजिक संगठनों में भारी गुस्सा भी भरा हुआ है, और संगठनों ने इसके ख़िलाफ़ उग्र प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई है।
फिर वहीं फ़िल्म मेकर नीरज पांडे ने भी अपनी फ़िल्म ‘घूसखोर पंडत’ पर आधिकारिक बयान भी जारी किया है।
और उन्होंने पोस्ट किया, हमारी फ़िल्म एक फ़िक्शनल कॉप ड्रामा है, और ‘पंडत’ शब्द का इस्तेमाल सिर्फ़ एक काल्पनिक किरदार के बोलचाल वाले नाम के तौर पर ही किया गया है।
फिर इतना ही नहीं कहानी एक व्यक्ति के काम और फ़ैसलों पर केंद्रित है और किसी जाति, धर्म या समुदाय पर कोई टिप्पणी भी नहीं करती या उसका प्रतिनिधित्व भी नहीं करती।
और उन्होंने लिखा, हम जानते हैं कि फ़िल्म के टाइटल से कुछ दर्शकों को ठेस पहुंची है, और हम उन भावनाओं को भी अच्छे से समझते हैं।
और फिर इन चिंताओं को देखते हुए, हमने फ़िलहाल सभी प्रमोशनल मटेरियल हटाने का फ़ैसला किया है।
क्योंकि हमारा मानना है कि फ़िल्म को पूरी तरह से उस कहानी के संदर्भ में ही समझा जाना चाहिए जो हम बताना चाहते थे, न कि कुछ हिस्सों को देखकर कोई राय भी बनाई जाए।