गंगा के बाद यमुना की बाढ़ का असर लगातार बढ़ रहा, जानिए कहां कैसा संकट मंडरा रहा

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गंगा के बाद अब यमुना भी उफान पर है। और खतरे का निशान पार भी कर चुकी है। दिल्‍ली से लेकर आगरा, मथुरा तक शहरों के कई-कई मुहल्‍ले डूबने को हैं।

और लोग घर-बार छोड़कर जाने को मजबूर हैं। और दिल्ली में यमुना नदी एक बार फिर अपने उफान पर है और पुराने रेलवे ब्रिज के पास हालात बेहद गंभीर भी हो चुके हैं।

केंद्रीय जल आयोग के आधिकारिक पूर्वानुमान के अनुसार, दिल्ली रेलवे ब्रिज पर यमुना नदी का जलस्तर लगातार खतरनाक स्थिति में बना हुआ है।

और 206.36 मीटर तक पहुंच भी गया है, जो कि खतरे के निशान 205.33 मीटर से 1.03 मीटर ऊपर है।

और जलस्तर में अभी भी बढ़ोतरी का रुझान है जिससे शहर में कई इलाकों में बाढ़ आ गई है और खतरा और भी गहरा गया है।

साथ ही यमुना का जलस्तर मंगलवार रात के दौरान 208.36 मीटर तक पहुंचा था, जो ऐतिहासिक ऑल टाइम हाई 208.66 मीटर से मात्र 0.30 मीटर कम रहा।

साथ ही मिली जानकारी के अनुसार, हरियाणा से लगातार भारी मात्रा में पानी छोड़े जाने के कारण दिल्ली प्रशासन हाई अलर्ट पर है।

फरीदाबाद के 8 गांव, गौतमबुद्ध नगर के याकूबपुर छपरौली और वाजिदपुर समेत कई स्थानों में स्कूलों को भी बंद करा दिया गया है।

और यमुना के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा लगातार बना हुआ है।

साथ ही जिला प्रशासन ने निचले इलाकों का खाली कराने का काम शुरू कर दिया है और लोगों को लगातार सतर्क रहने की सलाह भी दी है।

और मंत्री प्रवेश वर्मा ने बताया कि प्रशासन युद्धस्तर पर काम कर रहा है और निकासी व राहत कार्यों में कोई कमी भी नहीं रहने दी जाएगी।

फिर इसके बाद हरियाणा के फरीदाबाद जिले में नदी किनारे बसे 8 गांवों के स्कूल भी बंद करा दिए गए हैं।

और फिर गौतमबुद्ध नगर और अन्य प्रभावित गांवों में भी स्कूल बंद हैं। और बड़खल झील का जलस्तर बढ़ने और नमो घाट की रेलिंग के पानी में डूबने जैसे संकेत बाढ़ के खतरे को और बढ़ा रहे हैं।

और बावजूद इसके, नदी तलहटी के बहुत सारे लोग अपने घर छोड़ने को तैयार नहीं हैं, जिससे संभावित खतरा बना हुआ है।

यहां तक कि यमुना की बाढ़ का असर सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश में भी इसके व्यापक प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।

और यूपी में वर्तमान में 22 जिले बाढ़ प्रभावित हैं, जिसमें 607 गांव और शहरी क्षेत्र के 22 वार्ड भी शामिल हैं।

और यहां कुल प्रभावित जनसंख्या 1,41,000 तक पहुंच गई है और कई जिले, जैसे आगरा, मथुरा, गंभीर स्थिति का सामना भी कर रहे हैं।

और फिर यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे निचले इलाकों में रह रहे हजारों लोगों के लिए खतरा भी बढ़ गया है।

और प्रशासन और सरकार की ओर से सतत निगरानी, बचाव व राहत कार्यों को पूरी तत्परता के साथ लागू भी किया जा रहा है, लेकिन पानी की बढ़ती धार के आगे शहर और गांवों के रहवासियों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं।

साथ ही बाढ़ के इस संकट से प्रभावित लोगों के जीवन को सामान्य करने के लिए प्रशासन की कार्रवाई लगातार जारी है।

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