आत्मसम्मान के लिए ही अलंकार की मां ने भी छोड़ दी थी बैंक की नौकरी, फिर उसी राह पर चले पढ़ें PCS अधिकारी अग्निहोत्री

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अब यूजीसी के नए नियम के विरोध और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के समर्थन में नौकरी छोड़ने वाले पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री मूल रूप से ही केशवनगर के डब्ल्यू ब्लाक के रहने वाले हैं।

और फिर बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट के पद से इस्तीफा देने के बाद से उनका नाम लगातार सुर्खियों में भी बना हुआ है।

फिर इससे पहले उनकी मां भी आत्मसम्मान को ठेस पहुंचने पर बैंक की नौकरी से इस्तीफा दे चुकी हैं।

और श्याम नगर निवासी सेवानिवृत्त विंग कमांडर व अलंकार के ताऊ एसके सिंह ने बताया आत्मसम्मान के लिए कभी परिवार के सदस्यों ने कोई समझौता नहीं किया।

और छोटे भाई विजय के निधन के बाद बहू गीता ने बैंक आफ बड़ौदा में 21 साल तक कैशियर की नौकरी की।

फिर उन्होंने बताया कि आइआइटी बीएचयू से बीटेक करने के बाद अलंकार ने वर्ष 2017 तक बेंगलुरु, नार्वे और फिर अमेरिका में नौकरी की।

हालांकि वह इससे संतुष्ट नहीं थे। और फिर वह समाज से जुड़कर कुछ करना चाहते थे। वर्ष 2017 में अमेरिका से शहर आने के बाद अलंकार ने उनसे इसको लेकर चर्चा की।

इसके साथ ही ताऊ ने बताया कि आइएएस के लिए उनकी उम्र निकल चुकी थी। फिर उनके कहने पर अलंकार ने नौकरी छोड़ पीसीएस की तैयारी की और पहली ही बार में पांचवीं रैंक भी हासिल की।

फिर उसके लिए आत्मसम्मान से बढ़कर कुछ भी नहीं है। फिर उनका स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से कोई लेना-देना नहीं था, लेकिन जिस तरह से एक बटुक से दुर्व्यवहार किया गया।

और फिर अलंकार उससे काफी दुखी थे। इसका जिक्र भी उन्होंने किया था। और फिर वहीं, चचेरे भाई राजेश बोले- भाई ने जो भी फैसला लिया है वह बहुत सोच-समझकर लिया है।

वह कहीं न कहीं युवाओं के हित में उठाया गया कदम है। साथ ही बहन व भाइयों के पैरों पर खड़ा होने के बाद अलंकार ने यूपीपीएससी की परीक्षा दी।

और पहली ही परीक्षा में वर्ष 2019 में पास हुए और 15वीं रैंक भी हासिल की। और फिर वह अब तक लखनऊ, उन्नाव व बलरामपुर में एसडीएम के पद पर भी रह चुके हैं।

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