न्यूज़लिंक हिंदी। नरेंद्र मोदी सरकार अगर वक्फ कानून में संशोधन करती तो इसका सबसे बड़ा असर उत्तर प्रदेश में पूर्ण रूप से देखने को मिलेगा। देश में सबसे अधिक वक्फ संपत्तियां यूपी में हैं।
कई संपत्तियों पर विवाद हैं। लखनऊ के सआदतगंज में शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने 2016 में एक शिवालय की जमीन को वक्फ संपत्ति में दाखिल कर लिया। शिवालय पक्ष ने बहुत कोशिश की लेकिन सुनवाई नहीं हई। दो साल पहले नए शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सामने मामला पहुंचा तो मामले की जांच भी मुख्य रूप से हुई।
पाया गया 1864 के राजस्व खातों में वह जमीन शिवालय के नाम दर्ज है। खुलासे के बाद शिवालय की जमीन वक्फ संपत्ति से अलग की गई।लखनऊ के कपूरथला में स्थित जामा मस्जिद तकिया दलमीर शाह की जमीन कब्जाने के लिए नई कमिटी भी बनाई गई। नई कमिटी ने मस्जिद की आय बढ़ाने के नाम पर उसकी जमीन पर बहुमंजिला इमारत बनाने का प्रस्ताव बना लिया।
तय हुआ कि वहां बेसमेंट में पार्किंग, भूतल व पहले तल पर शॉपिंग मार्केट बनाई जाएगी। जबकि दूसरे और तीसरे तल पर मस्जिद होगी। विरोध होने पर सुन्नी वक्फ बोर्ड ने नई कमिटी को भंग कर उस प्रस्ताव को भी पूर्ण रूप से रद कर दिया।
वैसे तो यूपी में सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के पास उनकी कितनी संपत्तियों पर अवैध कब्जा है, इसका सरकार के पास कोई भी लेखा-जोखा नहीं है। सुन्नी और शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सीईओ अजीज अहमद के मुताबिक, राज्य सरकार वक्फ की संपत्तियों और उनके विवादों की सूची तैयार करवा रही है। इसे तैयार होने में अभी और भी वक्त लगेगा।
अब यह मामले वक्फ की संपत्तियों के विवाद या यूं कहें उनकी संपत्तियों पर अवैध कब्जों से भी संबंधित हैं। वक्फ बोर्ड के अधिकारियों की मानें तो यूपी में सुन्नी और शिया वक्फ बोर्ड के पास लगभग करीब 2.32 लाख संपत्तियां हैं, जिनकी अनुमानित कीमत करीब पौने तीन लाख करोड़ रुपये के करीब है।

