रूस पर लगे प्रतिबंध के बावजूद भी अमेरिका ने ही उन सभी देशों को रूसी तेल और पेट्रोलियम को ख़रीदने की अस्थायी अनुमति भी दी है जो इस समय समुद्र में जहाजों पर भी लदा हुआ है।
और फिर अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने ये भी कहा कि यह कदम युद्ध के दौरान अंतरराष्ट्रीय तेल बाज़ार में सप्लाई बनाए रखने के लिए एक अस्थायी उपाय भी है।
और फिर यह अनुमति 11 अप्रैल तक ही लागू रहेगी। इसके साथ ही बेसेंट ने ये भी कहा, यह बहुत सीमित और थोड़े समय के लिए उठाया गया कदम है।
और फिर यह केवल उस तेल पर लागू होगा जो पहले से ही जहाजों में लदा हुआ और रास्ते में भी है। और फिर इससे रूसी सरकार को कोई बड़ा वित्तीय लाभ भी नहीं मिलेगा।
और फिर ईरान युद्ध के बाद से तेल की कीमतों में काफ़ी बढ़ोतरी भी हुई है, और फिर एक समय में यह 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 120 डॉलर पर भी पहुंच गई थी।
हालांकि अभी अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर युद्ध जल्द ख़त्म करने के बारे में बयान देने के बाद भी कीमतों में गिरावट आई और ये 100 डॉलर प्रति बैरल तक भी आ गई।
लेकिन गुरुवार को तेल की कीमतें एक बार फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर भी पहुंच गईं।
और फिर इसके साथ ही दुनिया भर के शेयर बाजारों में गिरावट भी दर्ज़ की गई। दरअसल खाड़ी क्षेत्र में तीन और मालवाहक जहाजों पर हमले होने की वजह से तेल के दाम भी बढ़ गए।
इसके अलावा ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा ख़ामेनेई ने ये भी कहा है कि वो होर्मुज़ स्ट्रेट को बंद भी करेंगे।
और फिर होर्मुज़ ने एक अहम समुद्री मार्ग भी है। और फिर इससे होकर दुनिया के लगभग 20 फ़ीसदी तेल की सप्लाई भी होती है।