भारत और मालदीव में चल रहें तनाव के बीच, पूर्व राजनयिक का दावा- रूढ़िवादी इस्लामिक तत्वों को दे रहा बढ़ावा

कुछ लोग मालदीव के लोगों के दिमाग में जहर घोल रहे हैं। चीन की इसमें अहम भूमिका है। चीन द्वारा ही मालदीव में रूढिवादी इस्लामिक तत्वों को समर्थन दिया जा रहा है।

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न्यूज़लिंक हिंदी। मालदीव सरकार के तीन मंत्रियों ने पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए पोस्ट किए थे। जिन पर हंगामा हो गया। जिसके बाद सोशल मीडिया पर बायकॉट मालदीव ट्रेंड करने लगा। आपको बता दे कि मालदीव अपनी रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी भारत पर निर्भर है, लेकिन नई सरकार बनने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में थोड़ी तनातनी देखने को मिल रही है।

हालांकि मालदीव में भारत के पूर्व उच्चायुक्त रहे ज्ञानेश्वर मनोहर मुले का कहना है कि मालदीव में रूढ़िवादी इस्लामिक तत्वों का धड़ा सरकार में आया है और इसी वजह से भारत और मालदीव के रिश्तों में कड़वाहट आ रही है।

भारत विरोध के पीछे चीन का हाथ
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पूर्व राजनयिक ने बताया कि ‘मालदीव में लोकतंत्र अभी अपनी किशोरावस्था में है। भारत और मालदीव के रिश्तों की अहमियत और कम आपसी समझ के चलते यह तनाव की स्थिति बनी है। जब भी ऐसा होता है तो इसका मतलब होता है कि कुछ लोग मालदीव के लोगों के दिमाग में जहर घोल रहे हैं। चीन की इसमें अहम भूमिका है। चीन द्वारा ही मालदीव में रूढिवादी इस्लामिक तत्वों को समर्थन दिया जा रहा है। मालदीव में मौजूदा सरकार भी इसी रूढ़िवादी धड़े की है।’

मौजूदा सरकार का झुकाव इस्लामिक विचारधारा की तरफ
आगे पूर्व उच्चायुक्त का कहना है कि ‘मौजूदा सरकार का झुकाव इस्लामिक विचारधारा की तरफ है और इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मोहम्मद मुइज्जू ने अपना पहला विदेश दौरा तुर्किए का किया और उनका दूसरा दौरा चीन का हुआ है। इससे साफ पता चलता है कि मालदीव की मौजूदा सरकार का झुकाव किस तरफ रहने वाला है।’

2015 में इंडिया आउट कैंपेन चलाया
बता दे कि ये उल्लेखनीय है कि मोहम्मद मुइज्जू, मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन के समर्थक हैं। राष्ट्रपति अब्दुल्ला अपनी चीन समर्थक नीति और भारत विरोध के लिए जाने जाते हैं। साल 2013-2018 के बीच यामीन ने मालदीव में चीन के कर्ज के जाल की शुरुआत की थी।

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अब्दुल्ला यामीन ने ही मालदीव में साल 2015 में इंडिया आउट कैंपेन चलाया था। मुइज्जू ने भी राष्ट्रपति बनते ही मालदीव से भारत के सैनिकों को वापस भेजने का भी एलान कर दिया था। अब मुइज्जू के स्टैंड से भी साफ है कि वह भारत पर चीन को वरीयता देने वाले हैं।

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