न्यूज़लिंक हिंदी। माँ हमारा क्या कुसूर था , तीन बच्चों की मौत व सलामत बचे सोनू को देख उनकी बुआ के आंखों से आंसू नहीं थम रहे थे। रोते हुए प्रियंका को ही कोसे जा रहीं थीं। कह रही थी कि प्रियंका की हरकत को बच्चों की परवरिश की खातिर बहुत ही ज्यादा नजरअंदाज किया, लेकिन इतनी बड़ा कदम उठा लिया।
मां हमारा क्या कसूर था। पहले जन्म दिया और अब जान ले रही हो। मरते हुए तीनों बच्चों के दिल से यही चीख पुकार बराबर निकली होगी। नदी के किनारे पहुंचा हर व्यक्ति की आंखें यही सोच कर भर आईं। सामने मौत को देखकर बच्चे किस हद तक सहम गए थे। इसका अंदाजा सोनू को देखकर लगाया जा सकता था।
डरे सहमे सोनू की हलक से आवाज ही नहीं निकल रही थी। पति की मौत के बाद लाड़-प्यार से चार बच्चों की परवरिश कर रही मां का माथा क्यों ठनका कि वह अपने ही बच्चों की जान लेने पर पूरी तरह से उतर आई। घटनास्थल पर मौजूद लोगों के जहन में बार-बार यही सवाल परेशान कर रहा था।
पति अवनीश की मौत के बाद प्रियंका अपने चचेरे देवर आशीष के साथ दो माह से औरैया में रह रही थी। घटनास्थल पर मौजूद प्रियंका की चाची गीता ने बताया कि गुरुवार सुबह वह चाय बना रहीं थीं। तभी प्रियंका का फोन आया। वह बोली कि अब मैं जान दे दूंगी। आशीष भी शराब पीकर विवाद करता है।
इसके बाद गीता सीधे औरैया पहुंचीं, लेकिन प्रियंका यहां नहीं मिली। सुबह से ही आशीष बिस्तर पर शराब के नशे में धुत था। प्रियंका व बच्चों की खोजबीन करते इससे पहले ही सेंगुर नदी पर घटना होने की जानकारी मिली। घटना के बारे में सुन-सुन कर मौके पर मौजूद हर किसी का दिल से दहल उठा। तीन मासूमों की लाशें देख हर किसी का दिल भर आया।
हत्यारिन मां को सभी कोसते नजर आए। एक सवाल लोगों के जहन में रहा कि आखिरकार बच्चों पर वात्सल्य उड़ेलने वाली मां उनकी कातिल कैसे हो गई। क्या विषम परिस्थितियां थीं, जिनके आगे भी ममत्व हार गया। पुलिस महकमे के अधिकारी भी शव तलाशने व ले जाने में जुटे रहे।
पुलिस अधीक्षक चारू निगम भी एक पल को बच्चों के शव देख बुरी तरह सहम गईं। उन्होंने सलामत रह गए बड़े बेटे सोनू को अपनेपन का अहसास कराया, तो उसने जैसे-तैसे मां की क्रूर हरकत को बताया। जान गवां चुके तीन बच्चों की चीखें प्रत्यक्षदर्शी सोनू की जुबानी बयां हो रही थी।
बच्चों की बुआ आरती व ज्योति ने बताया की भाभी प्रियंका भाई की मृत्यु के बाद से ही जरा जरा सी बात पर लड़ाई झगड़ा करने लगती थी। उनके जिंदा रहते भी प्रियंका ने उनके साथ मारपीट की थी, लेकिन बच्चों की खातिर सब चुप चाप बर्दास्त कर जाते थे। भतीजों के पालन पोषण की खातिर घर के लोग भी उसका बुरा नहीं मानते थे। अवनीश की मौत के एक साल बीतते ही वह मायके जाकर रहने की बात करने लगी।
इसके बाद सभी ने उसकी इच्छा को मानते हुए मायके जाने की स्वीकृति दे दी, लेकिन मायके में भी वह नहीं रुकी और चचेरे देवर आशीष के साथ औरैया जाकर रहने लगी। बच्चों की खातिर खामोश रहे कि बच्चे पल जाएं। लेकिन प्रियंका इतनी क्रूर निकलेगी यह कभी नहीं सोचा था। अब एक भतीजा सोनू बचा है। इसका पालन पोषण वह लोग अब खुद करेंगे।
देर शाम सदर कोतवाली में प्रियंका के ससुराल व मायके पक्ष के लोग पहुंचे। जहां उनके बीच तमाम तरह की चर्चा मुख्य रूप से होती रही। मिली जानकारी के अनुसार,तो इसमें चर्चा प्रियंका के पति अवनीश के मौत को लेकर भी हुई। सूत्रों के अनुसार एक पक्ष का कहना था कि अवनीश की करंट लगने से मौत भी संदिग्ध थी जबकि दूसरे पक्ष का कहना था कि प्रियंका को पति की मौत के मामले में मिली मुआवजे की पांच लाख रुपये की धनराशि भी अभी तक नहीं दी गई।

