न्यूज़लिंक हिंदी। भारत की आईटी सिटी बेंगलुरू में तापमान लगातार बढ़ रहा है। गर्मी बढ़ने के साथ ही पानी की डिमांड बढ़ रही है। सात मार्च को बेंगलुरु का न्यूनतम तापमान 21 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 34 डिग्री सेल्सियस रहा। मार्च की इस गर्मी में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। जल संकट के जूझ रहे बेंगलुरु में लोग पानी सोच समझकर ही खर्च कर रहे हैं। इंडस्ट्री भी परेशान है। विजयनगर समेत शहर के कई स्कूल और कोचिंग सेंटर बंद कर दिए गए हैं। एक सप्ताह के लिए ऑनलाइन क्लासेज का आदेश दिया गया है।

बता दे की खुद डिप्टी सीएम डी के शिवकुमार ने बताया कि बेंगलुरू के सदाशिवनगर स्थित उनके घर का बोरवेल पहली बार सूखा है। सदाशिवनगर सैंकी झील के किनारे बसा है। पेयजल संकट का आलम यह है कि 1000 लीटर पानी के टैंकर के लिए लोग पहले 600 से 800 रुपये खर्च करते थे, अब 1800 से 2000 रुपये देने पड़ रहे हैं। बेंगलुरु वॉटर सप्लाई और सीवरेज बोर्ड (BWSSB) के अनुसार, बेंगलुरू के बाहरी इलाकों में हालत ज्यादा गंभीर है। इन इलाकों में वॉटर सप्लाई के लिए सरकार मिल्क टैंकर का उपयोग करने की प्लानिंग कर रही है।
यहां गहराया संकट
बंगलूरू के विजयनगर में स्थित एक कोचिंग सेंटर ने अपने छात्रों को एक सप्ताह के लिए ‘आपातकाल’ के कारण ऑनलाइन क्लास लेने के लिए कहा। वहीं, शहर के बन्नेरघट्टा रोड पर एक स्कूल बंद हो गया। स्कूल प्रशासन ने छात्रों को वर्चुअल कक्षाओं में भाग लेने के लिए कहा है।
अल नीनो जिम्मेदार
आपातकाल का मतलब गंभीर जल संकट से है। कर्नाटक इस साल जल संकट का सामना कर रहा है। इसका एक कारण पिछले साल कम बारिश होना है। भारतीय मौसम विभाग ने कम बारिश के लिए अल नीनो प्रभाव को जिम्मेदार ठहराया है।
यह उठाए जा रहे कदम
बंगलूरू विकास के प्रभारी डिप्टी सीएम शिवकुमार ने शहर में पानी की मांग को पूरा करने के लिए निजी टैंकरों और निजी बोरवेल को लेने की घोषणा की। यहां तक कि दूध के टैंकरों का भी पानी की आपूर्ति के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। सरकार प्रति टैंकर पानी की दर तय करने पर भी विचार कर रही है।
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सिद्धारमैया के अनुसार, कर्नाटक के 136 तालुकों में से 123 तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया है और 109 गंभीर रूप से प्रभावित हैं। कर्नाटक सरकार ने पानी की समस्या को दूर करने के लिए तालुक स्तर के नियंत्रण कक्ष और हेल्पलाइन स्थापित करने का भी निर्णय लिया है। क्षेत्र के विधायक के नेतृत्व में तालुक स्तर के टास्क फोर्स को पानी की आपूर्ति और मवेशियों के लिए चारे की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए स्थापित किया गया है।
अधिकारी ने बताया कि बंगलूरू में बुधवार को तापमान 36 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हालांकि यह सन् 1986 के तापमान से कम है। मार्च, 1986 में तापमान 37.3 डिग्री तक चला गया था, लेकिन यह महीने के अंत में हुआ था। इस मार्च में हमारे पास अभी भी 24 दिन बाकी हैं।

