बिहार विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान इंडिया ब्लॉक के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी तेजस्वी यादव ने रविवार को ये कहा कि अगर उनका गठबंधन सत्ता में आता है तो वक़्फ़ अधिनियम को कूड़ेदान में फेंक दिया जाएगा।
और फिर बिहार में विधानसभा चुनाव की वजह से राजनीति अपने चरम पर है और तेजस्वी के इस बयान को लेकर लगभग सभी दलों ने प्रतिक्रिया भी दी हैं।
और तेजस्वी के इस बयान को महागठबंधन की सहयोगी वाम पार्टी और कांग्रेस के नेताओं का साथ मिला है तो एनडीए के घटक दल उन पर हमलावर हैं।
और फिर उनका कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री को केंद्र के बनाए क़ानून को रद्द करने का अधिकार नहीं है लिहाजा तेजस्वी लोगों को गुमराह ही कर रहे हैं।
इसके साथ ही तेजस्वी वक़्फ़ क़ानून 2025 के ख़िलाफ़ पहले भी मुखर रहे हैं। और फिर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने वक़्फ़ विधेयक के क़ानून बनने से कुछ दिन पहले ही इसके विरोध में प्रदर्शन किया था।
और फिर तेजस्वी यादव ने उसमें भाग लिया था और उसे ग़ैर-संवैधानिक बिल, अलोकतांत्रिक बिल बताते हुए पुरज़ोर विरोध भी किया था।
और साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि संसद में विधानसभा और विधान परिषद में भी उनकी पार्टी ने वक़्फ़ संशोधन विधेयक का विरोध किया था।
और फिर ठीक एक दिन पहले ही तेजस्वी की पार्टी आरजेडी के विधान परिषद के सदस्य एमएलसी अब्दुल कारी सोहैब ने भी वक़्फ़ अधिनियम की धज्जियां भी उड़ाई थीं।
और फिर उन्होंने वक़्फ़ क़ानून को “टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने” की धमकी भी दी थी। तो बिहार के मुस्लिम बहुल कटिहार से कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री तारिक अनवर ने भी तेजस्वी का पूर्ण समर्थन भी किया।
और फिर उन्होंने कहा, वक़्फ़ पर तेजस्वी के रुख़ का हम पूरा समर्थन भी करते हैं। और फिर कांग्रेस हमेशा इस संशोधन का विरोध करती रही है।
आगे उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री जैसे बीजेपी विरोधी अन्य प्रमुख नेताओं ने भी इसका विरोध भी किया है।
और फिर वहीं कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि 2029 में अगर केंद्र में कांग्रेस और इंडिया गठबंधन की सरकार बनी तो पहला क़दम वक़्फ़ क़ानून को ख़त्म करना ही होगा।
और फिर इतना ही नहीं हम ऐसे सभी क़ानूनों को ख़त्म करेंगे जिसका मक़सद मुसलमानों के प्रति दुश्मनी है।