न्यूज़लिंक हिंदी। बिलकिस बानो केस में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को सभी दोषियों की सजा माफी के गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया। कोर्ट ने सभी दोषियों को दो हफ्ते में सरेंडर करने के लिए कहा है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर अब AIMIM चीफ असदुद्दीन ओवैसी की प्रतिक्रिया आई है।
#WATCH | Hyderabad, Telangana: On Bilkis Bano case, AIMIM president Asaduddin Owaisi says, "Bilkis Bano fought her battle on her own for justice…The Supreme Court today said that the state of Gujarat acted in complicit with the convicts. The BJP government was helping rapists… pic.twitter.com/8SefiD96KN
— ANI (@ANI) January 8, 2024
उन्होंने कहा, बिलकिस बानो ने न्याय के लिए अपनी लड़ाई खुद लड़ी। सुप्रीम कोर्ट ने आज कहा कि गुजरात राज्य ने दोषियों के साथ मिलकर काम किया, बीजेपी सरकार में ही गुजरात में बलात्कारियों की मदद की जा रही थी। बीजेपी के दो विधायकों ने इन बलात्कारियों की रिहाई का समर्थन किया था।
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समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में ओवैसी ने कहा, उस वक्त नरेंद्र मोदी जब गुजरात के सीएम थे, तब माहौल बहुत खराब था। इसलिए इस केस को महाराष्ट्र में ट्रांसफर किया गया था। बीजेपी के लोगों ने इन दोषियों को छुड़ाया। बीजेपी के लोगों ने उनके गले में फूल की माला डाली। गुजरात में बीजेपी की सरकार रेप करने वालों की मदद कर रही थी। बीजेपी को 2 विधायकों ने कहा कि इन दोषियों को छोड़ दिया जाए।
बहादुरी के साथ लड़ाई लड़ने के लिए बिलकिस को बधाई- प्रियंका
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने कहा कि आखिर न्याय की जीत हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात दंगों के दौरान गैंगरेप की शिकार बिलकिस बानों के आरोपियों की रिहाई रद्द कर दी है। इस आदेश से भारतीय जनता पार्टी की महिला विरोधी नीतियों पर पड़ा हुआ पर्दा हट गया है। इस आदेश के बाद जनता का न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत होगा। बहादुरी के साथ अपनी लड़ाई को जारी रखने के लिए बिलकिस बानो को बधाई।
सीपीआई-एम नेता वृंदा करात ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। ये बहुत महत्वपूर्ण आदेश है। गुजरात सरकार ने इस पिटीशन का समर्थन किया और पैरवी की। गृह मंत्रालय ने भी इसका पूरा समर्थन दिया। केंद्र सरकार और गुजरात सरकार दोनों सुप्रीम कोर्ट के इस रोशनी में दोषी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा ये फ्रॉड है, डॉक्यूमेंट फ्रॉड है, क्या ये केंद्र सरकार और सॉलिसिटर जनरल को पता नही था और जो भी इसका दोषी हो जल्द से जल्द जेल के सलाखों के पीछे होना चाहिए।
कानून का शासन कायम रहना चाहिए- सुप्रीम कोर्ट
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गुजरात सरकार फैसला लेने के लिए उचित सरकार नहीं है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट का 2022 का फैसला भी रद्द हो गया है। इसमें गुजरात सरकार को उचित सरकार बताया गया था और साथ ही कहा गया था कि 1992 की नीति पर विचार करें। दोषियों की रिहाई के लिए गुजरात सरकार सक्षम नहीं है। रिहाई देने में महाराष्ट्र सरकार सक्षम सरकार है। कोर्ट ने सभी 11 दोषियों को दो हफ्ते में सरेंडर करने के लिए कहा है। साथ ही साथ कोर्ट का कहना है कि कानून का शासन कायम रहना चाहिए।

