न्यूजलिंक हिंदी नेशनल डेस्क।
भारत सरकार यूनिफॉर्म सिविल कोड लागू करने की तैयारी में है। भारतीय विधि आयोग ने इसको लेकर तमाम धार्मिक संगठनों से उनका सुझाव मांगा है। जिसके लिए तीस दिनों तक सुझाव आमंत्रण की अवधि निश्चित की गई है।आपकी जानकारी के लिए बता दें कि भारत सरकार द्वारा लाए गए इस यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून की व्यवस्था करना है। ताकि किसी भी भारतीय नागरिक के साथ कोई पक्षपात न हो और बिना धर्म, जाति या समुदाय के आधार पर सभी के लिए निष्पक्ष कानून की सुविधा प्रदान की जा सकें।
अब इस मसले पर बसपा चीफ मायावती का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के खिलाफ नहीं है, पर देश की विविधता को देखते हुए इसे जबरन थोपे जाने के पक्ष में नहीं है। इसमें आपसी सहमति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए और इस पर राजनीति नहीं करनी चाहिए।
On the Uniform Civil Code, BSP national president Mayawati, says "The implementation of UCC will strengthen the country and unite Indians. It will also develop a sense of brotherhood among people. The forceful implementation of UCC is not right, politicising this issue will… pic.twitter.com/msdy7leb0a
— ANI (@ANI) July 2, 2023
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Mayawati ने कहा कि भारत की विशाल आबादी में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और पारसी समेत विभिन्न धर्मों के मानने वाले लोग रहते हैं। जिनके अलग-अलग रस्म और रिवाज हैं। जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। अगर देश में सभी के लिए एक जैसा कानून लागू होगा तो इससे देश कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत होगा और आपसी सौहार्द बढ़ेगा इसीलिए संविधान में समान नागरिक संहिता का जिक्र किया गया है, लेकिन उसे जबरन थोपने का प्रावधान संविधान में निहित नहीं है। मायावती ने कहा कि इसके लिए जागरूकता व आम सहमति का रास्ता अपनाया जाना चाहिए।

