न्यूज़लिंक हिंदी। कोरोना वायरस के सबसे बड़ा खतरनाक स्वरूप के खिलाफ भारत में अब नया टीका तैयार होगा। इसके लिए केंद्र सरकार की विशेषज्ञ कार्य समिति ने अध्ययन की अनुमति देने की सिफारिश की है। कोरोना वायरस के एक्सबीबी 1.5 उप स्वरूप के खिलाफ देश के अलग-अलग अस्पतालों में तीसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण किए जाएंगे, जिनके आधार पर अब नया टीका तैयार होगा।
यह कॉर्बेवैक्स टीके का नया संस्करण किया जायेगा । कॉर्बेवैक्स देश का पहला ऐसा टीका है, जिसे पांच से 80 वर्ष तक के लोगों को दिया गया। समिति के वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि 7 दिसंबर को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन की बैठक में भारतीय कंपनी बायोलॉजिकल ई के आवेदन पर चर्चा हुई, जिसमें कंपनी ने कोरोना के एक्सबीबी 1.5 उप स्वरूप के लिए कॉर्बेवैक्स टीका पर तीसरे चरण के बारे में क्लीनिकल ट्रायल करने की अनुमति मांगी थी।
इस पर समिति ने पांच वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग में टीके के क्लिनिकल परीक्षण की अनुमति देने की सिफारिश को मंजूर कर लिया है।
इसलिए नए टीके की जरूरत पढ़ीं,
कोरोना वायरस का एक्सबीबी. 1.5 उप स्वरूप माना गया है, जिसका मूल ओमिक्रॉन उप स्वरूप वंशावली से जुड़ा है। यह अब तक का सबसे आनुवंशिक रूप से समृद्ध और सबसे अधिक संक्रामक ओमिक्रॉन उप स्वरूप को माना जाता है। इसी साल जनवरी माह में इस स्वरूप की वजह से अमेरिका में कोरोना संक्रमण के मामलों में भारी उछाल देखने को भी मिला।
भारत के पास अब कोरोना के 22 टीके उपलब्ध हैं,
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत के पास कोरोना वायरस के खिलाफ 22 टीके राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल हैं। इनमें कोवाक्सिन और कोविशील्ड दो ऐसे टीका हैं, जिन्हें बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध कराने की अनुमति पूर्ण रूप से दी गई है, जबकि स्पूतनिक, मॉडर्ना, जॉनसन, जायको डी, इनकोवैक सहित 15 टीके आपातकालीन उपयोग की शर्त के साथ मौजूद हैं। इनके अलावा पांच टीके एहतियाती खुराक के लिए भी अस्पतालों में उपलब्ध कराये गए हैं।

