न्यूज़लिंक हिंदी । दिल्ली व एनसीआर में एक बार फिर धीरे-धीरे प्रदूषण बढ़ने लगा है. हल्की सर्दी के शुरुआत के साथ दिल्ली में धीरे-धीरे प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा हुआ देखने को मिल रहा है। जो आने वाले समय में चिंता का विषय हो सकता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों को देखे रविवार सुबह दस बजे नोएडा के तीन इलाकों की हवा खराब व एक इलाके की हवा बहुत खराब श्रेणी में दर्ज की गयी विशेषज्ञों का कहना है कि अगर इसी तरीके से लगातार दिल्ली एनसीआर में वायु प्रदूषण बढ़ता रहेगा तो वह दिन दूर नहीं जब दिल्ली गैस चेंबर में तब्दील हो जाएगी. वहीं, दूसरी ओर अधिकारियों के लिए बढ़ता हुआ वायु प्रदूषण चिंता का विषय बन गया है.

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औद्योगिक नगरी में जल्द प्रदूषण भरे दिनों की शुरुआत हो सकती है।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों से पता चलता है कि मुंडका, डीयू में नॉर्थ कैंपस, एनएसआईटी द्वारका, इहबास दिलशाद गार्डन और वज़ीरपुर ‘खराब’ श्रेणी में थे, मुंडका 279 के एक्यूआई के साथ सबसे प्रदूषित था. एक अधिकारी ने कहा, ‘जैसे-जैसे दिल्ली में ठंड बढ़ेगी, हवा की गुणवत्ता खराब होने लगेगी. शांत हवा की स्थिति, कम तापमान और अन्य मौसम संबंधी कारक प्रदूषकों के राष्ट्रीय राजधानी के आसमान में फंसने का कारण बनेंगे.’
शहर में जिन जगह पर निर्माण गतिविधियां चल रही हैं। उन जगहों पर प्रदूषण रिकॉर्ड तोड़ स्थिति में है। धूल, कचरा जलाने, ट्रैफिक जाम वातावरण में प्रदूषण की मात्रा बढ़ा रहा है। सूक्ष्म कण पेड़, पौधे, सड़क आदि पर जमा हैं। ट्रैफिक जाम से मुक्ति, सड़कों की धूल कम करने के लिए पानी का छिड़काव आदि कदमों को तुरंत उठाने की जरूरत है।
नोएडा में15 अक्टूबर से जिले में GRAP लागू है इसके बावजूद भी वायु स्तर बेहद खराब श्रेणी में है. विशेषज्ञों की मानें तो दशहरे पर रावण दहन के बाद वायु प्रदूषण दूर के कारण तेजी से बढ़ा है. माना जा रहा है कि दीपावली से पहले रेड जोन में पहुंचे AQI की वजह से कई पाबंदियां बढ़ाई जा सकती हैं. जबकि दिल्ली सरकार भी लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तैयारियों में जुटी हुई है.
वायु की गुणवत्ता का पैमाना..
हवा की गुणवत्ता को मापने के लिए सीपीसीबी ने मानक तय किए हैं, जिसके तहत 0-50 के बीच एक्यूआइ का मतलब ‘अच्छा’ यानि हवा को साफ माना जाता है। 51-100 के बीच मतलब वायु की शुद्धता ‘संतोषजनक’ होती है। 101-200 के बीच ‘मध्यम’ होती है। 201-300 के बीच ‘खराब’ होती है। 301-400 के बीच ’बेहद खराब’ होती है। 401 से 500 के बीच ’गंभीर श्रेणी’ में माना जाता है।

