न्यूजलिंक हिंदी, कानपुर। बिल्हौर के नानामऊ गंगा घाट पर शनिवार को गंगा स्नान करते समय डूबे प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. आदित्यवर्धन सिंह उर्फ गौरव का पांचवें दिन बुधवार को भी कोई पता नहीं चल सका। अब तो परिवार की भी सारी उम्मीदें टूट गई हैं। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी हताश होकर बुधवार को लौंट गईं।
लखनऊ के इंदिरा नगर निवासी वाराणसी के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज के डिप्टी डायरेक्टर डॉ.आदित्यवर्धन सिंह उर्फ गौरव शनिवार को नानामऊ घाट पर गंगा नहाते समय डूब गए थे। वह अपने दो दोस्तों के साथ गंगा नहाने पहुंचे थे। शनिवार से ही स्थानीय गोताखोरों के साथ पुलिस और पीएसी की टीमें तलाश में जुट गई थीं। दूसरे दिन से एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी गंगा को छान रही थीं, लेकिन उन्हें बरामद करने में कामयाबी नहीं मिल सकी
एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमों ने नानामऊ घाट से लेकर शिवराजपुर, बिठूर और फिर कानपुर के गंगा बैराज तक स्टीमर के जरिए सर्च ऑपरेशन चलाया, लेकिन हाथ खाली ही रहे। बुधवार को भी टीमें सुबह से शाम तक तलाश में जुटी रहीं, लेकिन मिलने की उम्मीद छोड़ चुके परिवार के लोग पांचवें दिन घाट नहीं पहुंचे। आस्ट्रेलिया से आने के बाद गौरव के पिता रमेश चंद्र और मां शशिप्रभा दो दिन से नानामऊ घाट पर ही सुबह से शाम तक डेरा डाले रहे।
पांचवें दिन बुधवार शाम सर्च ऑपरेशन खत्म होने के बाद एनडीआरएफ व एसडीआरएफ की टीमें में भी वापस लौट गई हैं। हालांकि पुलिस और स्थानीय गोताखोरों अभी तलाश कर रहे हैं। बुधवार को दो ड्रोन कैमरों के जरिए सर्च ऑपरेशन चलाया गया, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। गंगा में तेज बहाव और पानी का अधिक फैलाव होने के कारण तलाश में दिक्कतें आ रही हैं।
मिट्टी की कटान से दबने की आशंका
गंगा नदी में पांच दिन से सर्च ऑपरेशन चला रही टीमें भी हताश हो गई हैं। खोजबीन में जुटे जवानों का कहना है कि जिस तरह सर्च ऑपरेशन चलाया गया है, उससे अब तक बरामद हो जाना चाहिए था। निर्जीव शरीर पानी के ऊपर आ चाहिए था। ऐसे में आशंका है कि बाढ़ से मिट्टी की कटान में दब सकते हैं या फिर जलीय जंतु अपना शिकार बना सकते हैं।

