न्यूज़लिंक हिंदी। गर्मी के मौसम में लोगों की धड़कनें और भी ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं। घबराए रोगी कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट की इमरजेंसी पहुंच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तापमान के उछाल मारने के बाद गर्मी से धड़कन बढ़ने वाले रोगियों की संख्या में इजाफा हुआ है।
इलाज के बाद रोगियों की स्थिति सामान्य हो जाती है। उनका कहना है कि अधिक गर्मी पड़ने पर हृदय के अंदर विद्युत प्रवाह में शॉर्ट सर्किट की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे रोगी को लगता कि दिल में उथल-पुथल मच गई। धड़कनें पूर्ण रूप से अनियमित हो जाती हैं।
सामान्य रूप से दिल की धड़कन एक मिनट में 60 से सौ के बीच होनी चाहिए। लेकिन कार्डियोलॉजी में इस वक्त जो रोगी आ रहे हैं, उनकी धड़कनें 170-180 के बीच हैं। इससे हृदय को पंपिंग में दिक्कत होती है। इसी वजह से रोगी चक्कर और गश आने के लक्षण लेकर आ रहे हैं। सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अवधेश कुमार शर्मा ने बताया कि हार्ट के ढंग से पंपिंग न कर पाने की वजह से शरीर की ब्लड सप्लाई में पूर्ण दिक्कत आ सकती है।
इससे आक्सीजन की कमी के साथ खून का थक्का जमने खतरा भी रहता है। इससे ब्रेन स्ट्रोक भी पड़ सकता है। डॉ. शर्मा का कहना है कि वैसे तो यह दिक्कत 50 वर्ष अधिक आयु के लोगों को होती है लेकिन इस वक्त युवा भी यह समस्या लेकर आ रहे हैं। इसके अलावा महिलाओं की भी संख्या अच्छी-खासी बढ़ रही है।

