न्यूज़लिंक हिंदी। नोबेल पुरस्कार के विजेताओं के एलान के सिलसिले में आज इकोनॉमिक्स के नोबेल प्राइज की घोषणा हुई। अमेरिका की क्लाउडिया गोल्डिन (Claudia Goldin) को इकोनॉमिक्स का नोबेल पुरस्कार पुरस्कार देने की घोषणा हुई और महिलाओं के श्रम बाजार के परिणामों के बारे में हमारी समझ को बेहतर बनाने के लिए उन्हें इस प्राइज के लिए चुना गया है। क्लाउडिया गोल्डिन को मार्केट में महिलाओं के कामकाज और उनके योगदान को बेहतर तरह से समझाने के लिए ये सम्मान दिया गया है। क्लाउडिया गोल्डिन यह पुरस्कार जीतने वाली केवल तीसरी महिला हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार नोबेल कमेटी ने लेबर मार्केट में गोल्डिन की रिसर्च को बेहतरीन माना है। लेबर मार्केट रिसर्च में महिलाओं के साथ हो रहे पक्षपात और उनकी कमाई को लेकर गोल्डिन ने रिसर्च किया है। उन्होंने 200 साल के आंकड़ों को स्टडी कर ये रिपोर्ट तैयार की है। इसमें उन्होंने बताया कि जेंडर का रोजगार और कमाई पर क्या असर पड़ता है।
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This year’s economic sciences laureate Claudia Goldin showed that female participation in the labour market did not have an upward trend over a 200 year period, but instead forms a U-shaped curve.
The participation of married women decreased with the transition from an agrarian… pic.twitter.com/PFVNNy5NOw
— The Nobel Prize (@NobelPrize) October 9, 2023
पुरस्कार राशि के के रूप में नौ लाख सात हजार डॉलर मिलेंगे
अल्फ्रेड नोबेल की स्मृति में अर्थशास्त्र क्षेत्र में दिए जाने वाले स्वेरिजेस रिक्सबैंक पुरस्कार के विजेता को 10 मिलियन स्वीडिश क्रोना यानी करीब नौ लाख सात हजार डॉलर दिए जाते हैं। पिछले साल का पुरस्कार अमेरिका स्थित अर्थशास्त्री बेन बर्नांके, डगलस डायमंड और फिलिप डायबविग को बैंकों और वित्तीय संकटों पर उनके काम के लिए दिया गया था।
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डिटेक्टिव बनना चाहती थीं क्लॉडिया गोल्डिन
क्लॉडिया ने अपने इंटरव्यू में बताया कि वो डिटेक्टिव बनना चाहती थीं और उन्होंने खुद को एक डिटेक्टिव (जासूस) के रूप में हमेशा देखा क्योंकि वो चीजों के कारण और तथ्यों को खोजने के लिए हमेशा तैयार रहती थीं। 20 साल पहले उन्होंने एक पीस लिखा था जिसका विषय ‘इकोनॉमिक्स डेटिक्टिव’ पर था। उस समय से लेकर आज तक वो तथ्यों की खोज के जरिए सवालों के जवाब ढूंढने की कोशिश करती रहती हैं और इसी तरह उन्होंने हमेशा अपने शोध और रिसर्च कार्य को किया है। वो छोटी बच्ची थीं तब से वो डिटेक्टिव वर्क के प्रति उत्सुक रहती थीं। उन्होंने कहा कि डिटेक्टिव होने के पीछे सोच ये रहती है कि आप खुद से सवाल पूछते रहें और उनके सवालों के जवाब मिलने तक कार्यरत रहें। आज भी उनके अंदर ये सोच जिंदा है।

