न्यूजलिंक हिंदी, दिल्ली। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को दिल्ली शराब नीति मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को गिरफ्तार कर लिया। दो घंटे की पूछताछ के बाद केजरीवाल को गिफ्तार कर ईडी की टीम मुख्यालय लेकर रवाना हो गई।
“मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद आम लीडर आतिशी ने कहा कि हमें खबर मिली कि ईडी ने अरविंद केजरीवाल को गिरफ्तार कर लिया है। लोकसभा चुनाव से पहले हुई यह कार्यवाही पूरी तरह से राजनीतिक साजिश है। उन्होंने पीएम मोदी का नाम लेते हुये कहा कि यदि पीएम यह सोचते हैं कि हम डर जाएंगे तो यह भूल है। अरविंद केजरीवाल दिल्ली के सीएम थे…हैं…और रहेंगे, जरूरत पड़ी तो वह जेल से सरकार चलाएंगे। वह दिल्ली के सीएम बने रहेंगे। हमने सुप्रीम कोर्ट में मामला दायर किया है। हमारे वकील SC पहुंच रहे हैं। हम आज रात सुप्रीम कोर्ट से तत्काल सुनवाई की मांग करेंगे।”
#WATCH | AAP leader Atishi says, "We have received news that ED has arrested Arvind Kejriwal… We have always said that Arvind Kejriwal will run the govt from jail. He will remain the CM of Delhi. We have filed a case in the Supreme Court. Our lawyers are reaching SC. We will… pic.twitter.com/XWQJ1D6ziR
— ANI (@ANI) March 21, 2024
पूरा घटनाक्रम:
– 7 बजे रात – ईडी की टीम सीएम आवास पहुंची
– 7.10 बजे – ईडी ने अधिकारी को वारंट दिखाया
– 7:15 बजे – आप कार्यकर्ता सीएम आवास पर जुटना शुरू
– 7:17 बजे – आप कार्यकर्ताओं का हंगामा
– 7:20 बजे – ईडी की टीम को सीएम आवास में जाने दिया गया
– 7:42 बजे – सीएम आवास के बाहर सुरक्षा बढ़ाई
– 7:50 बजे – सीएम आवास पर बढ़ा हंगामा
– 8:45 बजे – आप विधायक व कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया
– 9:15 बजे – मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को किया गिरफ्तार
जानिये आखिर क्यों हो रही है कार्रवाई
नई शराब नीति से जनता और सरकार दोनों को नुकसान होने का आरोप है। वहीं, बड़े शराब कारोबारियों को फायदा होने की बात कही जा रही है। भारतीय जनता पार्टी का यही आरोप है। तीन तरह से घोटाले की बात सामने आ रही है। 17 नवंबर 2021 को दिल्ली सरकार ने राज्य में नई शराब नीति लागू की। इसके तहत राजधानी में 32 जोन बनाए गए और हर जोन में ज्यादा से ज्यादा 27 दुकानें खुलनी थीं। इस तरह से कुल मिलाकर 849 दुकानें खुलनी थीं। नई शराब नीति में दिल्ली की सभी शराब की दुकानों को प्राइवेट कर दिया गया। इसके पहले दिल्ली में शराब की 60 प्रतिशत दुकानें सरकारी और 40 प्रतिशत प्राइवेट थीं। नई नीति लागू होने के बाद 100 प्रतिशत प्राइवेट हो गईं। सरकार ने तर्क दिया था कि इससे 3,500 करोड़ रुपये का फायदा होगा।

