इतिहास में पहली बार कड़ाके की ठंड में होने जा रही है चारधाम की शीतकालीन यात्रा, आज हरिद्वार से होगी शुरुआत

उत्तराखंड की चार धाम यात्रा ठंड के मौसम में बंद हो जाती है लेकिन इतिहास में पहली बार ऐसा होने वाला है कि कड़ाके की ठंड के बीच चार धाम यात्रा की शुरुआत होगी।

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न्यूज़लिंक हिंदी। उत्तराखंड की चार धाम यात्रा ठंड के मौसम में बंद हो जाती है लेकिन इतिहास में पहली बार ऐसा होने वाला है कि कड़ाके की ठंड के बीच चार धाम यात्रा की शुरुआत होगी। इतिहास की पहली शीतकालीन चारधाम यात्रा की आज से शुरुआत होगी। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद आज हरिद्वार से इस यात्रा की शुरुआत कर मिथक तोड़ेंगे। परंपरा के अनुसार खरसाली गांव में यमुना मंदिर में यात्रा का पहला पड़ाव।

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28 दिसंबर को यात्रा आगे बढ़ेगी और उत्तरकाशी के रास्ते 29 दिसंबर को हर्षिल में गंगा जी की शीतकालीन पूजा स्थल मुखवा गांव पहुंचेगी। 30 दिसंबर को उत्तरकाशी विश्वनाथ के दर्शन होंगे, फिर यहां से केदारनाथ के शीतकालीन पूजा स्थल ओंकारेश्वर का मार्ग तय किया जाएगा। 31 जनवरी को यात्रा बद्रीनाथ के शीतकालीन पूजा स्थल जोशीमठ पहुंचेगी। आइए जानते हैं कौन है जगतगुरु शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती जी, जो इस ऐतिहासिल चार धाम यात्रा का शुभारंभ करेंगे।

15 अगस्त 1969 को उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का जन्म हुआ। इनका मूल नाम उमाशंकर है। इनके स्वर्गवासी माता-पिता का नाम पंडित राम सुमेर पांडेय और माता अनारा देवी है। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद प्राथमिक शिक्षा प्रतापगढ़ में ही हुई लेकिन आगे की पढ़ाई के लिे 9 साल की उम्र में परिवार की सहमति के बाद वह गुजरात चले गए। यहां धर्मसम्राट स्वामी करपात्री जी महाराज के शिष्य ब्रह्मचारी रामचैतन्य के सानिध्य में गुरुकुल में संस्कृत शिक्षा ग्रहण की।

ज्याेतिर्मठ के मीडिया प्रभारी डाॅ. बृजेश सती ने बताया कि जगतगुरु शंकराचार्य की चारधाम की यात्रा 27 दिसंबर से शुरू होगी। इस दौरान मां यमुना की शीतकालीन पूजा स्थल खरसाली पहुंचेंगे। इसके साथ ही सायंकालीन पूजा और आरती में शामिल होंगे। कहा, शंकराचार्य द्वारा 2500 वर्ष पूर्व स्थापित परंपराओं का निर्वहन करते हुए ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य शीतकालीन पूजास्थलों की तीर्थयात्रा कर रहे हैं। यात्रा का समापन तीन जनवरी 24 को हरिद्वार में होगा।

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कुछ दिन पहले सीएम धामी ने शंकराचार्य को शुभकामनाएं देते हुए कहा था कि शीतकालीन तीर्थयात्रा ऐतिहासिक होगी। आदिगुरु शंकराचार्य की ढाई हजार वर्ष पूर्व स्थापित परंपराओं का निर्वहन करते हुए ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य शीतकालीन पूजा स्थलों की तीर्थ यात्रा कर रहे हैं।

आदिगुरु शंकराचार्य परंपरा के इतिहास में यह पहला अवसर है जब ज्योतिषपीठ के आचार्य चारधामों के पूजा स्थलों की तीर्थ यात्रा कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ने शंकराचार्य की यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा था कि उनकी तीर्थ यात्रा से चारधामों में शीतकालीन यात्रा को बढ़ावा मिलेगा।

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