नरक चतुर्दशी के दिन है हनुमान जन्मोत्सव, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह, इस विधि से करें पूजा

बचपन में सूर्य को फल समझकर खा जाने वाले महाबली हनुमान का जन्मोत्सव वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा तिथि पर और दूसरी कार्तिक कृष्ण की चतुर्दशी के दिन। कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर ही नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली भी मनाई जाती है।

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न्यूज़लिंक हिंदी। बचपन में सूर्य को फल समझकर खा जाने वाले महाबली हनुमान का जन्मोत्सव वर्ष में दो बार मनाया जाता है। पहला हिन्दू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल की पूर्णिमा तिथि पर और दूसरी कार्तिक कृष्ण की चतुर्दशी के दिन। कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर ही नरक चतुर्दशी और छोटी दिवाली भी मनाई जाती है। इस बार कार्तिक माह वाली हनुमान जयंती 11 नवंबर 2023, शनिवार के दिन है। इस दिन हनुमान जी की विशेष रूप से पूजा अर्चना होती है। बड़े-बड़े पर्वत उठाने वाले, समुद्र लांघ जाने वाले और स्वयं ईश्वर का कार्य संवारने वाले संकटमोचन की पूजा करने से जीवन में कभी भी संकटों का सामना नहीं करना पड़ता है।

लेकिन क्या आप जानते हैं नरक चतुर्दशी के दिन यमदेव की पूजा करने के अलावा भी कुछ और खास होता है। दरअसल, इस दिन हनुमान जी की पूजा करने का भी विधान है। ऐसी मान्यता है कि, नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी की विधिनुसार पूजा करने से जीवन के समस्त कष्टों से मुक्ति मिलती है। इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि आखिर क्यों नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी की पूजा की जाती है।

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इसलिए की जाती है पूजा
हनुमान जी की जन्मतिथि को लेकर कई मान्यताएं हैं। वाल्मीकि की रामायण के अनुसार माना जाता है कि हनुमान जी का जन्म कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन स्वाति नक्षत्र में हुआ था। यह तिथि दिवाली से एक दिन पहले यानी नरक चतुर्दशी की तिथि के रूप में पड़ती है। इसलिए नरक चतुर्दशी पर भगवान हनुमान की पूजा का भी विधान माना गया है। हालांकि, हनुमान जी की जयंती को लोग अपनी-अपनी मान्यताओं के अनुसार भी मनाते हैं।

हनुमान पूजा 2023 मुहूर्त
इस साल नरक चतुर्दशी पर हनुमान पूजा 11 नवंबर को रात में होगी। इस दिन हनुमान पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11 बजकर 45 मिनट से देर रात 12 बजकर 39 मिनट तक है।

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हनुमान जन्मोत्सव की पूजा विधि

  • इस दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े पहनें।
  • फिर रात में शुभ मुहूर्त के दौरान बजरंगबली की मूर्ति या प्रतिमा को लकड़ी की चौकी पर स्थापित करें, जिसपर पहले से ही पीले रंग का वस्त्र बिछा हुआ हो।
  • बजरंगबली के समक्ष घी का दीया जलाएं।
  • जल छिड़कर कच्चा दूध, दही, घी और शहद मिलाकर बजरंगबली का अभिषेक करें।
  • बजरंगबली को लाल या पीले रंग का कपड़ा, कलावा, फूल, धूप, अगरबत्ती और दीया आदि अर्पित करें।
  • इसके बाद हनुमान चालीसा का पाठ कर भक्त पूजा संपन्न कर आशीर्वाद पाने की कामना करें।
  • इस दिन हनुमान भक्तों को हनुमान चालीसा, बजरंग बाण, सुंदरकांड और रामायण का पाठ करना चाहिए।

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