न्यूज़लिंक हिंदी। इसराइल और हमास में युद्ध के चलते मध्य-पूर्व में बने तनावपूर्ण हालात के बीच भारत के विदेश सचिव विनय क्वात्रा रविवार को ईरान पहुँचे।
यहाँ उन्होंने ईरान के राजनीतिक मामलों के विदेश उप-मंत्री के साथ बैठक में हिस्सा लिया।
यह बैठक 18वीं इंडिया-ईरान फ़ॉरन ऑफ़िस कंसल्टेशन (एफ़ओसी) के तहत हुई. वैसे तो यह एक सामान्य बैठक थी, लेकिन इसमें काफ़ी महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने बताया है कि इस बैठक में अफ़ग़ानिस्तान और ग़ज़ा में बने हालात पर विमर्श के अलावा द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की गई और कनेक्टिविटी से जुड़ी परियोजनाओं, जैसे कि चाबहार बंदरगाह पर भी बात हुई।
चाबहार बंदरगाह पर बात होना इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह भारत, ईरान और रूस, तीनों के बीच हुए एक समझौते के लिए काफ़ी अहम है।
भारत की राजधानी नई दिल्ली में सितंबर में हुए जी20 सम्मेलन में कई देशों के नेताओं ने भारत से पश्चिमी एशिया से होते हुए यूरोप तक एक नया ट्रेड रूट बनाने की पहल की थी।
भारत, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका और कई यूरोपीय देशों ने एक ‘भारत-यूरोप-मध्य पूर्व कॉरिडोर’ (आईएमईसी) बनाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।
बहुत से विश्लेषक इस पहल को चीन की ‘बेल्ट एंड रोड परियोजना’ से मुक़ाबले और ईरान को अलग-थलग करने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं।
ऐसा भी माना जा रहा था कि भारत की दिलचस्पी ईरान के चाबहार बंदरगाह और आईएनएसटीसी की बजाय इस नए व्यापारिक रास्ते में ज़्यादा हो सकती है।
इसी बीच, अमवाज मीडिया में छपी एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ‘ईरान शायद भारत की इसी स्थिति को भांपते हुए चीन के साथ ‘25 वर्षीय सहयोग कार्यक्रम’ बनाने लिए तैयार हुआ है। ‘
रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्यक्रम के तहत चीन ने चाबहार बंदरगाह के बाक़ी हिस्सों को विकसित करने के लिए सहमति बनाई है, बदले में वह इस बंदरगाह को इस्तेमाल कर सकेगा।

