न्यूज़लिंक हिंदी। गर्मी के तेवर इस बार बहुत ही ज्यादा बदले नजर आ रहे हैं। चार दिन पहले ही अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस बार तापमान का स्तर देखकर गर्मी को आंकना भारी भूल हो सकती है। इस वर्ष 40 डिग्री तापमान पर भी 45 से 47 डिग्री की गर्मी का असर हो रहा है।
गर्मी के तेवर इस बार बदले नजर आ रहे हैं। चार दिन पहले ही अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विज्ञानियों के अनुसार इस बार तापमान का स्तर देखकर गर्मी को आंकना भारी भूल हो सकती है। इस वर्ष 40 डिग्री तापमान पर भी 45 से 47 डिग्री की गर्मी का असर और भी ज्यादा हो रहा है।
गर्मी संग आर्द्रता का स्तर गड़बड़ा रहा है, वेट-बल्ब टेंपरेचर की स्थिति बन रही है जो कम तापमान में भी जानलेवा मौसम का संकेत भी बराबर बना हुआ है। दुनिया में वर्ष 2023 को सौ साल में सबसे ज्यादा गर्म साल माना गया है, लेकिन इस वर्ष के संकेत भी अच्छे नहीं हैं।
मौसम विभाग ने भी देश के ज्यादातर हिस्सों में तापमान बढ़ने की चेतावनी दी है। आशंका तो है कि कुछ हिस्सों में अधिकतम तापमान 50 डिग्री तक जा सकता है। लू चलने के साथ इसमें आर्द्रता का भी समावेश है। 15 अप्रैल को कानपुर में आर्द्रता का स्तर 64 प्रतिशत हो गया था।
कृषि मौसम विज्ञानी डा.एसएन सुनील पांडेय के अनुसार मौसम में वेट-बल्ब टेंपरेचर की स्थितियां बराबर बन रही हैं, जो ज्यादा खतरनाक है। वेट-बल्ब टेंपरेचर अगर 35 डिग्री तक पहुंच गया तो गर्मी से लोगों की मौत भी शुरू होने लगेगी जिस तरह पिछले वर्ष नवी मुंबई के एक कार्यक्रम में मौजूद 11 लोगों की मौत लू लगने से हो गई थी।
वातावरण में मौजूद आर्द्रता की वजह से शरीर से पसीना तो निकलता है लेकिन वातावरण की नमी उसे सूखने नहीं देती। इससे शरीर का शीतलन तंत्र फेल होने लगता है। महत्वपूर्ण अंगों हृदय, फेफड़ा, किडनी के फेल होने का खतरा बढ़ जाता है।

