अमेरिका के कई शहरों में शनिवार को ही ट्रंप प्रशासन के ख़िलाफ़ ही व्यापक प्रदर्शन हुए हैं।
और फिर यह ‘नो किंग्स’ रैली का तीसरा दौर है, जिसमें पहले भी लाखों लोग शामिल हुए थे।
और फिर आयोजकों का कहना है कि वे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों के ख़िलाफ़ प्रदर्शन भी कर रहे हैं।
और फिर इनमें ईरान में जंग, संघीय इमिग्रेशन कार्रवाई और बढ़ती महंगाई भी शामिल हैं।
इसके साथ ही अमेरिका के सभी 50 राज्यों में 3,200 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन करने की योजना भी बनाई गई थी।
और फिर आयोजकों ने कहा, ट्रंप हमें तानाशाह की तरह चलाना भी चाहते हैं। लेकिन यह अमेरिका है, यहाँ ताक़त जनता की है, किसी नक़ली राजा या उनके अरबपति दोस्तों की भी नहीं।
इसके अलावा व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने इन प्रदर्शनों को ‘ट्रंप डिरेंजमेंट थेरेपी सेशन’ बताया और कहा।
कि इनकी परवाह सिर्फ़ वही लोग भी करते हैं जिन्हें इन्हें कवर करने के लिए पैसे भी दिए जाते हैं।
और इसके साथ ही शनिवार को पूरे दिन लगभग हर बड़े अमेरिकी शहर में प्रदर्शन हुए, जिनमें न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन डीसी और लॉस एंजेलिस भी शामिल हैं।
ये भी बता दें कि वॉशिंगटन डीसी के डाउनटाउन में दोपहर भर रैलियां भी चलीं, और फिर लोग राजधानी की सड़कों पर मार्च भी करते रहे।
और फिर प्रदर्शनकारियों ने लिंकन मेमोरियल की सीढ़ियों पर भी प्रदर्शन भी किया गया।
और फिर कई बड़े डेमोक्रेट नेताओं ने सेंट पॉल में स्टेट कैपिटल बिल्डिंग के बाहर मंच पर भाषण भी दिए गए।
और फिर नो किंग्स प्रदर्शों की शुरुआत पिछले साल जून में ही राष्ट्रपति ट्रंप के जन्मदिन पर हुई थी।
फिर जिसमें अनुमानित 40 से 60 लाख लोगों ने 2,100 विरोध प्रदर्शनों में भाग भी लिया था।