न्यूज़लिंक हिंदी। भारतीय सेना अब और ज्यादा हाइटेक होने जा रही है। उनके हथियारों को AI से जोड़ा जाएगा। इससे सीधे तौर पर ताकत बढ़ने के साथ दुश्मनों के लिए बचना मुश्किल होगा। सेना ने इसके लिए टेस्टिंग शुरू कर दी है। भारतीय थल सेना के लेफ्टिनेंट कर्नल निपुण सिरोही ने हथियारों को आधुनिक बनाने के लिएस्मार्ट स्कोप डेवलप किया है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से सैनिकों को सटीक निशाना लगाने में मदद करेगा।
इसेएआई बेस्ड स्कोप फॉर टारगेट एक्विजिशन एंड एंगेजमेंट (ASTRAE) नाम दिया गया है। इसका उद्देश्य फायरिंग ऑपरेशन के दौरान सैनिकों को सटीक निशाना लगाने में मदद करना है। हाल में लेफ्टिनेंट कर्नल सिरोही ने सेना के एक सेमिनार में इस अत्याधुनिक तकनीक को पेश किया था। जानिए, यह तकनीक कैसे दुश्मन के सैनिकों को मार गिराने में मदद करेगी।
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आसान भाषा में समझें तो डिवाइसनुमा स्कोप को किसी भी छोटी बंदूक पर लगाकर उसे स्मार्ट बंदूक में बदला जा सकता है। 300 मीटर के इलाके में किसी भी तरह का खतरनाक मूवमेंट होने पर यह सैनिक को आगाह करेगी। सैनिक जहां निशाना लगाना चाहता है स्कोप वहां के टारगेट को लॉक करता है और सैनिक को शूट करने का सही समय बताता है।
स्कोप का एआई सिस्टम कैमरे से रियल टाइम डेटा को प्रोसेस करता है। एल्गोरिदम और सेंसर डेटा की मदद से स्कोप पहले टारगेट का पता लगाकर उस पर एक लाल बाउंडिंग बॉक्स बनाएगा। इसके बाद इसमें शामिल कैमरा लेज़र और फ़ाइंडर की मदद से बंदूक की एलाइनमेंट यानी सिधाई की जांच करता है। कॉम्प्लेक्स एल्गोरिदम की मदद से स्कोप गणना करके सैनिक को बताता है कि किस हिस्से से गोली चलाने से गोली निशाने पर लगेगी। एलाइनमेंट ठीक होने पर टारगेट बॉक्स लाल से हरे रंग का हो जाएगा जो शूटर को गोली चलाने का सिग्नल देगा। इसमें लगे कैमरेमें 50mm का लेंस है और 30 टाइम्स ज़ूम है।
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अगर एआई की मदद से ‘एक शॉट, एक हिट’ क्षमता को हासिल कर लिया जाता है तो यह काफी फायदेमंद साबित होगा। आसान भाषा में समझें तो इसका मतलब है कि एक गोली में ही सटीक निशाना लगाना ताकि गोलियों को बेकार होने से रोका जा सके। ऐसा होने पर सैन्य अभियानों को और भी बेहतर तरीके से चलाया जा सकेगा। इससे सैन्य खर्च में भी कमी आएगी।
ASTRAE स्कोप के कारण खतरों को पहले ही पहचानने और उनसे निपटने में मदद मिलेगी। इस स्मार्ट स्कोप को भारत में ही विकसित किया जा रहा है। 100-300 मीटर तक टेस्ट करने पर इसकी सटीकता 90 प्रतिशत तक मापी गई है। अभी यह प्रोटोटाइप फेज़ में है। स्कोप पर और सुधार किए जा रहे हैं। जैसे स्कोप में फिलहाल केवल दिन में फायरिंग करने की क्षमता है, लेकिन इसे रात में भी फायरिंग करने के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा स्कोप के आकार को और छोटा बनाया जाएगा।

