न्यूज़लिंक हिंदी। कुछ कर गुजरने की चाह ने प्रदीप को दी कामयाबी, भले ही हादसे में दोनों हाथ गंवा दिए लेकिन हौसला बिल्कुल भी नहीं खोया। स्कूल की पढ़ाई की फिर कॉलेज से पीजी किया और सरकारी शिक्षक बनकर अब बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
दिव्यांग प्रदीप के जुनून ने अपनी पूरी जिंदगी को बदल दिया, प्रदीप दूसरे शिक्षकों के लिए भी प्रेरणा बने हुए हैं। दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद वे बच्चों को ब्लैकबोर्ड पर लिखकर पढ़ाते हैं और अपने ज्यादातर काम खुद ही करते हैं।
मुरैना से 65 किलोमीटर की दूरी पर पहाड़गढ़ जनपद के रामनगर गांव में सरकारी शिक्षक हैं, प्रदीप के दोनों हाथ बचपन में पशुओं के लिए चारा काटने वाली मशीन में चले गए और वो दोनों हाथ गवां बैठे।
हादसे के दिन उन्होंने सोच लिया था कि अब मेरा पूरा जीवन थम गया है और अब मैं कुछ भी नहीं कर पाऊंगा। भिंड जिले के रहने वाले दिव्यांग प्रदीप ने अपनी सोच को बदला और जुनून और हौसले से पूरी जिंदगी की बाजी को ही पलट दिया।
वो कहते हैं जिद्द करो दुनिया बदलो, अपनी जिद और जुनून के आगे दिव्यांग प्रदीप वह सब काम करते है जो सामान्य व्यक्ति करते हैं। ड्राइविंग को छोड़कर प्रदीप छोटे बच्चों को पढ़ाते हैं और अपने परिवार का भरण पोषण भी करते हैं।
प्रदीप लैपटॉप और मोबाइल को इस तरीके से चलाते हैं जैसे कोई सामान्य व्यक्ति ही चला रहा है। अपने दोनों हाथों से पेन पकड़कर साफ लेखनी में भी लिखते हैं। इसी प्रकार से बच्चों को भी ब्लैक बोर्ड पर चॉक से बच्चों को ऐसे पढ़ाते हैं जैसे सामान्य शिक्षक बच्चों को पढ़ाते हैं।

