मोटापा और हृदय की बीमारियों से बचाव के लिए केंद्र सरकार तेल का सेवन 10 फीसदी कम करने की लगातार मुहिम चला रही है, लेकिन वर्तमान में लोग जरूरत से तीन-चार गुना तक अधिक तेल भी खा रहे हैं।
और फिर इससे बीमारियां और शरीर में वसा का जमाव बढ़ रहा है। रोगियों की जांचों में तेल के अधिक सेवन से होने वाले दुष्प्रभाव सामने आ रहे हैं।
बच्चे, बड़े और महिलाएं सभी इसकी गिरफ्त में हैं। साथ ही फिजीशियन, इंडोक्रोनोलॉजिस्ट और गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट आदि विशेषज्ञों का कहना है कि जरूरत से अधिक तेल का सेवन मोटापा बढ़ा रहा।
और फिर इलाज करने के साथ रोगियों को तेल का सेवन घटाने की गाइडलाइन बताई जा रही है।
साथ ही जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के सीनियर फिजीशियन और इंडोक्रोनोलॉजी क्लीनिक प्रभारी डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने ये भी बताया कि सामान्य व्यक्ति को 20 से 30 मिली तक तेल का सेवन करना चाहिए और लोग 150 से 200 मिली आम तौर पर सेवन भी कर रहे हैं।
और फिर उन्होंने बताया कि जो मांसाहार के शौकीन हैं, वे 300 मिली तक तेल का सेवन करते हैं। और फिर इससे मोटापा होने लगता है।
शरीर के अंगों में वसा का जमाव हो रहा है। और बॉडी मास इंडेक्स 25 से अधिक होना मोटापा भी माना जाता है। और फिर जांचों में पाया गया कि इस स्थिति में खतरे के कारक उभरने लगते हैं।
गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार ने बताया कि रोगियों के खानपान में तेल की खपत अधिक है। और फिर इस वजह से लिवर में वसा का जमाव बढ़ता है और लिवर फैटी भी हो जाता है।
और फिर ये शिकायतें लेकर आ रहे मोटापाग्रस्त रोगी मोटापाग्रस्त 90 फीसदी रोगियों में कोलेस्ट्राल सामान्य से अधिक निकलता है।
और फिर इनमें हाइपरटेंशन के लक्षण भी रहते हैं। और फिर मोटापा वाले 95 फीसदी रोगियों का लिवर जांच में फैटी मिल रहा है।
साथ ही युवतियों में पीसीओडी की समस्या भी आ रही है। साथ ही बांझपन का खतरा रहता है। विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे से आंतों में अल्सर और कोलन कैंसर का खतरा भी होता है।