दुग्ध व्यापार के लिए अब इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा और न ही सही दाम के लिए फरियाद करनी पड़ेगी।
यदि सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से हुआ तो अप्रैल माह से निरालानगर स्थित पराग डेयरी प्लांट का तकरीबन 13 साल बाद फिर से संचालन शुरु हो जाएगा।
और फिर सोमवार को जिलाधिकारी ने प्लांट का निरीक्षण कर संचालन की तैयारियों की समीक्षा की।
फिर उन्होंने बताया कि मदर डेयरी और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड के सहयोग से प्लांट का संचालन होगा।
फिर इसमें प्रतिदिन लगभग चार लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण होगा और कानपुर मंडल के करीब एक लाख दुग्ध उत्पादक किसानों को सीधा लाभ भी मिलेगा।
और फिर जिलाधिकारी जितेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि साल 1962 में स्थापित पराग डेयरी प्लांट कानपुर ही नहीं बल्कि पूरे मंडल के प्रमुख और सबसे पुराने डेयरी प्लांटों में शामिल भी रहा है।
और फिर 2013 में विभिन्न कारणों से इसका संचालन बंद हो गया। फिर इसी क्रम में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड की इकाई इंडियन डेयरी मशीनरी कॉरपोरेशन लिमिटेड, आनंद के माध्यम से ही प्लांट का पुनर्विकास और उन्नयन कराया गया है।
फिर इस परियोजना की कुल लागत 160.64 करोड़ रुपये है। इसके अलावा प्लांट में प्रतिदिन लगभग 1.50 लाख लीटर पैक्ड दूध, 20 मीट्रिक टन मिल्क पाउडर, एक टन पनीर तथा आठ टन देसी घी के उत्पादन की क्षमता है।
और फिर गांव स्तर के कलेक्शन सेंटरों से दूध संग्रहित कर यहां प्रोसेस किया जाएगा। जिससे क्षेत्र के दुग्ध उत्पादक किसानों को अपने उत्पाद का बेहतर बाजार और समय पर भुगतान भी मिल सकेगा।
इसके साथ ही डीएम ने कहा कि पराग ब्रांड की पहचान और गुणवत्ता को बनाए रखा जाएगा।
और फिर प्लांट में गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अत्याधुनिक केंद्रीय प्रयोगशाला स्थापित भी की गई है।
फिर यहां प्रतिदिन आने वाले दूध की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाएगी और लैब टेस्टिंग के बाद ही उसे आगे के लिए भेजा जाएगा।
और फिर मदर डेयरी के यूनिट हेड विनय प्रताप सिंह ने ये भी बताया कि प्लांट पूरी तरह आधुनिक तकनीक से लैस है। फिर इसमें जापान और जर्मनी से मंगाए गए अत्याधुनिक उपकरण भी लगाए गए हैं।