न्यूज़लिंक हिंदी। सिर्फ स्टेट काउंसिल ऑफ़ वोकेशनल ट्रेनिंग की मान्यता से छात्रों को नौकरी मिलना मुश्किल हैं। प्रदेश भर में 190 करोड़ रूपए से बनाये जा रहे19 आईटीआई में करीब 14 हज़ार युवा तकनीकी हुनरमंद होने के बाद संस्थानों की ओर से उन्हें जो प्रमाणपत्र मिलेगा, वह उन्हें किसी भी सरकारी या बढ़े संस्थानों में नौकरी दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं होगा।
ऐसा इसलिए क्योकि इन 19 आईटीआई के पास एनसीवीटी ( नेशनल ऑफ़ वोकेशनल ट्रेनिंग ) की मान्यता ही नहीं हैं। प्रदेश सरकार ने कुछ साल पहले ज्यादा से ज्यादा युवाओ की तकनीकी हुनर से सिखाने की मंशा से 19 आईटीआई बनाने की निर्देश दिए थे। इन्हे कानपूर मंडल के इटावा के ताखा, कन्नोज के सैरिख, शिवराजपुर और सदर औरैया में आईटीआई बनाए जा रहे हैं 19 आईटीआई के निर्माण में सरकार ने करोड़ो रूपए तो खर्च किये हैं। पर इन संस्थानों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं हो पाई।
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शासन की ओर से नए पद सृजित न करने की नीति के चलते यहां पर आस पड़ोस के आई टी आई के शिक्षक प्रशिक्षण की जिम्मेदारी उठा रहे हैं इस के कारण यहाँ प्रशिक्षणकी गुडवत्ता प्रभावित हो रही हैं। महीने से 25 से 26 दिन प्रशिक्षण देना चाहिए पर 15 से 16 दिन प्रशिक्षणही दिया जा रहा हैं
शिक्षकों की संख्या मानक के अनुसार न होने के कारण एनसीवीटी ने इन संस्थानों के मान्यता प्रस्ताव के आवेदन को दरकिनार कर दिया हैं।
इन आई टी आई को फिलहाल एनसीवीटी के तहत संचालित किया जा रहा हैं। नियमो की मुताबिक , 12 ट्रेडो का संचालन करने वाले आई टी आई में एक प्रधानाचार्य , 30 अनुदेशक , तीन कार्यदेशक , सात प्रशासकी कर्मचारी और सफाई कर्मी समेत नौ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी होने चहिये। इन 19 आई टी आई में मानक के मुताबिक नियमित स्टाफ और अनुदेशक नहीं हैं।
शिक्षकों की कमियों को दूर करने की लिए राज्य व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद संविदा पर शिक्षकों की भर्ती करने की कवायद में जुटा हैं। हलाकि यह तरीका भी इन संस्थानों को एनसीवीटी का प्रमाण पत्र नहीं दिला पायेगा।

