न्यूज़लिंक हिंदी। हनुमंत बिहार क्षेत्र के नारायणपुरी मोड़ पर सड़क के किनारे खुले पढ़े नगर निगम के नाले में एम्बुलेंस संचालक की जान ले ली। वह बुधवार रात को बाइक समेत नाले में गिर गया। रातभर नाले में बाइक के नीचे दबा पढ़ा रहा। सुबह जब निकला गया तो उस की मौत हो चुकी थी।
पोस्टमार्टम में भी डूबने से मौत की पुष्टि हुई हैं। नारायणपुरी निवासी जग्गू यादव के तीन बेटों में सुमित यादव 32 साल का सब से छोटा था। वह मंझले भाई ललित के साथ एम्बुलेंस के संचालन का काम संभालता था। परिजनों ने बताया की सुमित बुधवार को एम्बुलेंस का हिसाब किताब करने गया था। नौबस्ता बंबा के पास स्थित एक हॉस्पिटल के बाहर एम्बुलेंस कड़ी करने की बाद सुमित रात करीब 2 बजे बाइक से घेर से लौट रहा था।
आशंका है कि घर के करीब पांच सौ मीटर दूर नारायणपुरी मोड़ के पास किसी वाहन या जानवर ने सुमित को टककर मार दी इस से वह नाले में गिर गया। गुरुवार करीब सुबह 6 बजे एक सख्श ने नाले में बाइक पढ़ी देख पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने बाइक नंबर के जरिये घरवालो का पता ढूंढा और उन्हें सूचना दी। इस बीच पुलिस ने आसपास के लोगो के मदद से बाइक और शव बाहर निकलवाया। थाना प्रभारी ने बताया कि नाले में बाइक समेत गिरने से मौत हुई हैं। पोस्टमार्टम में भी डूबने से मौत की बात सामने आई हैं।
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20 साल से खुला हैं मौत का नाला
जिस खुले नाले में गिरकर सुमित यादव की मौत हुई , 20 साल से खुला पढ़ा हैं। पार्षद धीरेंद्र सिंह ने बताया कि नाला जब से बना हैं , तभी से खुला हैं। पूर्व पार्षद मधु मिश्रा के पति संदीप मिश्रा ने बताया की एक बार पहले तत्कालीन नगर आयुक्त संतोष शर्मा ने नाले का निरक्षण किया था। हलाकि बजट की समस्या बता कर इसे टाल दिया गया था। जोन दो के अधिशसि अभियंता दिवाकर भास्कर ने बताया कि नाले को ढकने और निर्माण के लिए 49 लाख का प्रस्ताव तैयार किया गया था।

