न्यूज़लिंक हिंदी। कानपुर के जाजमऊ आगजनी मामले में आरोपी सपा विधायक इरफान सोलंकी को लोकसभा चुनाव के मद्देनजर रखते हुए पेशी पर कोर्ट नहीं लाया जा सका। कोर्ट का फैसला भी एक बार फिर टल गया है। एमपीएमएलए सेशन कोर्ट के विशेष न्यायाधीश सत्येंद्र नाथ त्रिपाठी ने अब 26 अप्रैल को लिखित बहस दाखिल करने के पूर्ण रूप से निर्देश दिए हैं।
जाजमऊ की डिफेंस कॉलोनी में स्थित एक प्लाट में रहने वाली नजीर फातिमा के घर में 7 नवंबर 2022 को आग लग गई थी। मामले में इरफान, रिजवान, मो. शरीफ, शौकत अली व इजराइल आटे वाला के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई पूर्ण रूप से चल रही थी। इरफान के अलावा रिजवान, शौकत अली व इसराइल आटे वाला कानपुर जेल में ही बंद हैं।
जबकि जमानत मिलने के बाद मोहम्मद शरीफ की जेल से रिहाई हो चुकी है। अभियोजन और बचाव पक्ष की बहस 1 मार्च को पूरी हो गई थी। इसके बाद कोर्ट ने फैसले के लिए 14 मार्च की तारीख मुकर्रर की थी। 14 को शरीफ और शौकत को नई जमानतें दाखिल करने के लिए समय दिया गया था और 19 मार्च की तारीख मुकर्रर कर दी गई थी। 19 मार्च को न्यायाधीश के अवकाश पर होने के कारण फैसला टल गया था और 22 मार्च की तारीख फैसले के लिए नियत की गई थी।
बहस सुनने के बाद 14 दिन में फैसला न सुना पाने के कारण फाइल दोबारा बहस पर चली गई थी और 22 मार्च को कोर्ट ने दोनों पक्षों की दोबारा संक्षिप्त बहस सुनकर फैसले के लिए 28 मार्च की तारीख नियत की थी। 28 मार्च को अदालत ने आदेश पूरा न लिखे जा पाने के कारण फैसले के लिए 4 अप्रैल की तारीख को मुकर्रर कर दिया गया था।
4 अप्रैल को कुछ बिंदुओं पर स्पष्टीकरण के लिए कोर्ट ने 6 अप्रैल की तारीख नियत कर दी थी।डीजीसी दिलीप अवस्थी ने बताया कि कोर्ट ने लिखित बहस दाखिल करने के लिए 26 अप्रैल की तारीख मुकर्रर कर दी है। महाराजगंज जेल में बंद इरफान को कोर्ट नहीं लाया गया। जिस कारण वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से इरफान की पेशी की गई जबकि रिजवान व अन्य आरोपी कोर्ट में पेश हुए और जमानत पर जेल से बाहर शरीफ भी फैसला सुनने के लिए कोर्ट भी पहुंचा।

