लोग पेट भर खाना भी खा रहे हैं, फिर भी उनके कुपोषण बना रहता है। और फिर शरीर में विटामिन, मिलरल्स, कैलिश्यम, फॉलिक एसिड की कमी हो रही है।
साथ ही हैलट की ओपीडी में आने वाले रोगियों की पैथोलॉजिकल जांचों की रिपोर्ट में यह तथ्य सामने आया।
और फिर औसत 80 फीसदी रोगियों को यह कमी निकल रही है। विटमिन, मिनरल्स आदि की कमी से न्यूरो, अस्थि रोग, मांसपेशियों और नसों के रोगों के लक्षण उभरने लगते हैं।
और रोगी हैलट, मेडिसिन और न्यूरो की ओपीडी में आ रहे हैं। अधिकांश रोगियों का आयु वर्ग 18 से 50 साल के बीच का है।
फिर इन रोगियों की हिस्ट्री लेने पर पता चलता है कि उनमें जंक फूड की लत तो है ही, इसके अलावा घर के खाने में पौष्टिकता नहीं रहती। और फिर 50 फीसदी लोग खाने में सलाद को तवज्जो नहीं देते।
साथ ही इससे पौष्टिक तत्वों के साथ ही फाइबर की कमी हो जाती है जिससे आंतों में दिक्कत आने लगती है। लोगों की फूड हैबिट भी बिगड़ी है।
इसके साथ ही मेडिसिन की ओपीडी में औसत 300, अस्थि रोग में औसत 200 और न्यूरो में औसत 150 रोगी प्रति ओपीडी आते हैं।
जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. विशाल कुमार गुप्ता का कहना है कि 80 फीसदी लोगों में विटामिन आदि की कमी निकलती है।
और फिर विटामिन बी12 की कमी से हाथ-पैरों में झनझनाहट होने लगती है। बी कॉम्प्लेक्स से त्वचा में सूखापन, विटामिन ए की कमी से आंखों में कमजोरी और रतौंधी भी होने लगती है।
और फिर वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. फहीम अंसारी ने बताया कि 75-80 फीसदी लोगों में विटामिन डी की कमी निकलती है।
फिर इससे कई तरह की बीमारियों के लक्षण उभरते हैं। कमी विटामिन और मिनरल्स की होती है।
और इससे कमी से होने वाली दिक्कतों को लोग रोग समझकर बेवजह दवाएं खाते रहते हैं।
विटामिन की कमी के रोगी मांसपेशियों, नसों आदि की दिक्कत लेकर आते हैं। इसके साथ हड्डियों में परेशानी भी आने लगती है।
इन बातों का ख़ास रखें ध्यान
भोजन में सलाद आवश्यक रूप से खाएं।
रेशेदार पत्तियों वाली सब्जियों का सेवन जरूर करें।
मौसमी फल प्रतिदिन जरूर लें।
सादा और पौष्टिक खाना अवश्य खाएं।
व्यायाम, चहलकदमी जरूर करें।
कुछ देर सुबह की धूप में भी जरूर बैठें।
जंक, फास्ट फूड का कम से कम सेवन करें।