आईआईटी कानपुर में गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी के तहत बनने वाले सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल की शुरुआत अब दिसंबर 2026 में होगी।
और फिर अस्पताल बनने के बाद 2027 से चिकित्सा के पीएचडी और पोस्ट ग्रेजुएट छात्रों की पढ़ाई भी शुरू होगी। अस्पताल में जटिल बीमारियों के इलाज के साथ गंभीर बीमारियों पर शोध कार्य भी होंगे।
साथ ही शहर से जुड़ी 300 किलोमीटर के इलाके की आबादी को अब गंभीर रोगों के इलाज के लिए दूरदराज अस्पतालों के चक्कर नहीं लगाने होंगे।
इसके अलावा आईआईटी कानपुर देश का पहला संस्थान होगा, जहां सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के साथ इंजीनियरिंग और मेडिकल दोनों की पढ़ाई होगी।
पूर्व छात्रों के सहयोग से बन रहे इस अस्पताल का नाम भी 100 करोड़ रुपये का दान देने वाले इंडिगो के सह संस्थापक और पूर्व छात्र राकेश गंगवाल के नाम पर है।
और फिर गंगवाल स्कूल ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड टेक्नोलॉजी में 500 बेड की व्यवस्था रहेगी।
परियोजना के पहले चरण में 500 बेड का एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, एक ऑन्कोलॉजी भवन के साथ एक इंजीनियरिंग ब्लॉक, बिजली सबस्टेशन और सीवेज उपचार सुविधा सहित आवश्यक सहायक बुनियादी ढांचे की स्थापना की जाएगी।
और फिर मेडिकल कॉलेज में पहले चरण में पीएचडी और पोस्ट ग्रेजुएट की पढ़ाई शुरू होगी, इसके बाद एमबीबीएस कराने की तैयारी है।
अस्पताल में सामान्य ओपीडी नहीं बल्कि कार्डियोवैस्कुलर थोरेसिस सर्जरी, गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी सर्जरी भी होगी। साथ ही संस्थान के निदेशक प्रो. मणींद्र अग्रवाल ने बताया कि यह हॉस्पिटल को पूरा करने का काम तेजी से किया जा रहा है।
और फिर कैंसर यूनिट खोलने की अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही हॉस्पिटल में एक विशेष यूनिट खोली जाएगी। अभी तक यह हॉस्पिटल 500 बेड का है।
अगर कैंसर यूनिट की अनुमति मिलती है तो 550 बेड का हॉस्पिटल करने की तैयारी है। साथ ही दूसरे चरण में अस्पताल की क्षमता को बढ़ाकर 1000 बेड किया जाना है।
क्लीनिकल विभागों, केंद्रों, अनुसंधान क्षेत्रों में विस्तार, पैरामेडिकल विषयों, वैकल्पिक चिकित्सा, अस्पताल प्रबंधन, स्पोर्ट्स मेडिसन और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों को शामिल भी किया जाएगा। दूसरे चरण को सात-10 वर्षों की अवधि में पूरा करने की योजना भी है।