लाल इमली और इसके कर्मचारियों-अफसराें का भविष्य फरवरी में आने वाले आम बजट से ही तय हो सकता है।
कर्मियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्त का पैकेज बजट में घोषित भी किया जा सकता है। और फिर वीआरएस देने के लिए कार्ययोजना भी बनाई जा रही है।
फिर सभी का ब्योरा भी मांगा गया है। और फिर मिल में 13 साल से उत्पादन बंद है। मिल की बंदी की तैयारी सालों से चल रही है।
2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में मिल बंदी की घोषणा होना मुश्किल है।इसके साथ ही लाल इमली और लाल इमली मिल में 2013 से उत्पादन बंद है।
एनटीसी 344 करोड़ के घाटे में चल रही है। सूत्रों ने बताया कि केंद्र एनटीसी, बीआईसी समेत नाै केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम को बंद कर सकता है।
और फिर वित्त वर्ष 2024 से इनमें व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो रही हैं। साथ ही फिलहाल बंदी के लिए समय सीमा तय नहीं की गई है।
और फिर संचालन की उम्मीद धुंधली पड़ चुकी है। पिछले साल अगस्त में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मिल चलाने के लिए पैकेज देने की घोषणा की थी लेकिन अब तक कोई पैकेज घोषित नहीं किया गया है।
फिर घोषणा के बाद कई बार मुख्यमंत्री शहर भी आए लेकिन मिल के संबंध में बात नहीं की। और फिर पूर्व में एनटीसी और बीआईसी को एक साथ बंद करने की रूपरेखा तैयार की गई थी।
पहले बीआईसी को बंद किए जाने की फाइल शुरू की गई। और फिर शहर में नेशनल टेक्सटाइल कॉरपोरेशन और ब्रिटिश इंडिया कॉरपोरेशन की 366 एकड़ जमीन है।
इसके अलावा बीआईसी की ज्यादातर जमीनें नजूल की हैं जो लीज पर दी गई हैं। फिर लीज खत्म होने के साथ ही जिला प्रशासन उन पर कब्जा वापस ले रहा है।
लाल इमली कर्मचारी संघ के अध्यक्ष अजय सिंह ने ये भी बताया कि कर्मियों को वीआरएस देने की प्रक्रिया शुरू हुई है।
उम्मीद है कि आम बजट में कर्मियों के लिए पैकेज के लिए बजट का आवंटन हो जाएगा। और फिर कपड़ा मंत्रालय ने मिल के सभी कर्मियाें का ब्योरा मांगा है।
फिर दस्तावेज भेजे गए हैं, पूर्व में आए 87.42 करोड़ रुपये में बची रकम से जल्द भुगतान भी हो सकता है। और कर्मियों के लीव इन कैशमेंट, बोनस भुगतान की मांग उठाई गई है।