कानपुर शहर में चोरों का बहुत ही ज्यादा हल्ला मचा है। और फिर लोगों ने चोरों के हाथों अपनी जिंदगी भर की जमापूंजी गंवाई, रिपोर्ट भी दर्ज कराई, लेकिन पुलिस उनका खुलासा नहीं कर पाई।
और फिर ऐसे में दहशत में लोगों ने चोरों की अफवाह पर रतजगा शुरू कर दिया है। कानपुर कमिश्नरी में हुई चोरियों के आंकड़े लोगों के मन के डर और पुलिस की नाकामी बयां कर रहे हैं।
और फिर इससे यह साबित हो रहा है कि बस पुलिस चोर ही नहीं पकड़ पा रही है। करीब तीन महीनों में 43 चोरियों के खुलासे न होने से पीड़ित बेबस हैं।
साथ ही चकेरी के श्यामनगर में चोरों ने ऑर्डनेंस कर्मी उपेंद्र कुमार सिंह के बंद घर का ताला तोड़कर 30 लाख रुपये का माल पार किया।
और फिर चकेरी के सफीपुर में विधानसभा अध्यक्ष के घर पास एक घर से तीन किराएदारों के घर में दिनदहाड़े लाखों की चोरी।
इसके अलावा चकेरी के सफीपुर हरजिंदनगर में सुमन के घर से 50 हजार की नकदी और 10 लाख कीमत के जेवर चोरी।
साथ ही चकेरी में शिक्षक अभिषेक के घर का ताला तोड़कर नकदी जेवर समेत करीब 20 लाख की चोरी।
इसके अलावा 12 सितंबर को नरवल के नरौरा गांव में दीपू कुशवाहा के घर में 10.75 लाख की चोरी।
और फिर 30 अगस्त को तिवारीपुर गांव में ताला तोड़कर 20 हजार की नकदी समेत 10 लाख की चोरी।
इसके अलावा 27 अगस्त को नरवल के बारादरी गांव में दूधिए के घर से 9.50 लाख की चोरी।
और फिर 24 अगस्त को भेवली में एक ही रात तीन घरों से 20 लाख की चोरी। साथ ही 22 अगस्त को महाराजपुर के तिलसहरी गांव में बंद घर का ताला तोड़कर 10 लाख की चोरी।
इतना ही नहीं कल्याणपुर मकड़ीखेड़ा में संसद की सुरक्षा में तैनात सीआरपीएफ जवान प्रदीप यादव के घर 10 लाख की चोरी।
सचेंडी के चकरपुर निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक सुरेश मिश्रा के घर आठ लाख की चोरी।
और फिर केसा कालोनी में फोम कारोबारी श्रीराम अग्रवाल के बंद घर का ताला तोड़कर 72 लाख की चोरीनाै अगस्त को बर्रा आठ में प्राइवेट कर्मी के घर से 25 लाख की चोरी।
इतना ही नहीं नाै अगस्त को बिधनू में मझावन सीएचसी में कर्मचारियों के आधा दर्जन आवासों के ताले तोड़कर 20 लाख की चोरी।
और फिर शहर की सुरक्षा व्यवस्था के लिए कमिश्नरी पुलिस ने करीब 12 हजार से ज्यादा ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत सीसीटीवी कैमरे लगवाए हैं।
लेकिन चोरी की घटनाओं में कोई खुलासा करने में कोई मदद नहीं मिल पा रही है। और फिर यही स्थिति कमजोर मुखबिर तंत्र की है।
पुराने तेजतर्रार सिपाही मुखबिर तंत्र के दम पर बड़े-बड़े खुलासे कर देते थे लेकिन नए जवान क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति से भी वाकिफ नहीं हैं।
सीसीटीवी फुटेज में कोई भी चोर कैद नहीं हुए थे। इसके साथ ही आशंका जताई जा रही थी कि चोरों ने जंगल के रास्ते घुसकर वारदात को अंजाम दिया था। मामले की जांच की जा रही है।