अहमदाबाद-मुंबई की तरह ही अब दिल्ली से वाराणसी तक हाईस्पीड रेलवे कॉरिडोर का निर्माण होगा। फिर यह कानपुर के बाहरी क्षेत्र से होकर गुजरेगा।
इसके बनने के बाद कानपुर से वाराणसी या दिल्ली डेढ़ से दो घंटे में पहुंच सकेंगे। और दिल्ली से वाराणसी जाने में चार घंटे का समय लगेगा। हालांकि यह निर्णय सर्वे और डीपीआर के बाद ही होगा।
अभी नई दिल्ली से वाराणसी वाया कानपुर वंदेभारत एक्सप्रेस लगभग साढ़े सात घंटे में पहुंचाती है।
वर्तमान में वाराणसी से दिल्ली वाया कानपुर सुपरफास्ट और वंदेभारत, राजधानी जैसी ट्रेनें अधिकतम 130 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से चलती हैं।
और फिर हाई स्पीड रेल कॉरिडोर बनने के बाद इस पर बुलेट ट्रेन 300 से 320 किमी की गति से चलेंगी।
साथ ही फ्लाइट से कानपुर से दिल्ली पहुंचने में लगभग 70 मिनट लगते हैं। हाईस्पीड ट्रेन से कानपुर से दिल्ली दो से ढाई घंटे और कानपुर से वाराणसी एक से डेढ़ घंटे में पहुंच सकेंगे।
फिर वहीं, दिल्ली से सीधे वाराणसी साढ़े तीन से चार घंटे में पहुंच सकेंगे। करीब 958 किलोमीटर का यह कॉरिडोर कानपुर के आउटर इलाकों से गुजरेगा, जिससे कृषि भूमि और बस्तियों का कम से कम अधिग्रहण होगा।
और फिर कानपुर को हाईस्पीड कनेक्टिविटी मिलने से शहर का औद्योगिक व व्यापारिक विकास भी होगा।
साथ ही दिल्ली से शुरू होकर नोएडा, जेवर एयरपोर्ट, आगरा, फिरोजाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर आउटर, लखनऊ, रायबरेली और भदोही होते हुए वाराणसी प्रस्तावित हैं।
फिर यह पूरी तरह से एलिवेटेड होगा, जो सुरक्षित रहेगा। मुंबई-अहमदाबाद हाईस्पीड रेल परियोजना की तरह दिल्ली-वाराणसी कॉरिडोर पर हाईस्पीड ट्रेनों का संचालन होगा। और फिर एक ट्रेन में करीब 750 यात्री बैठ सकेंगे।
इसके साथ ही कानपुर में हाईस्पीड कॉरिडोर कहां से गुजरेगा यह सर्वे और डीपीआर बनने के बाद तय होगा।
हालांकि, कन्नौज से होकर यह हाईस्पीड रेल कॉरिडोर कानपुर के बाहरी इलाकों औद्योगिक क्षेत्र उन्नाव, मगरवारा होते हुए लखनऊ तक जाने की पूर्ण संभावना है। फिर उसके बाद यह रायबरेली, भदोही होते हुए वाराणसी तक जाएगा।
और फिर बजट के अनुसार, हाई स्पीड कॉरिडोर निर्माण व कवच सुरक्षा प्रणाली के विस्तार पर 1.3 करोड़ खर्च होंगे।
और यात्री सुविधाओं को ध्यान में देखते हुए हाईस्पीड रेलवे कॉरिडोर का खाका तैयार किया गया है। बजट यात्रियों की दृष्टि से ही अच्छा है।
और फिर हाईस्पीड रेल काॅरिडोर बनने से यात्रियों के समय की बचत होगी। कवच की टेक्नोलॉजी से ट्रेनों की सुरक्षा और बेहतर होगी।
फिर रेलवे में हो रहे विकास में कर्मचारियों का अहम योगदान है इसलिए इस वर्ग का भी ख्याल रखना भी चाहिए।
साथ ही बजट में रेलवे अवसंरचना पर विशेष जोर दिया गया है जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
और फिर हाईस्पीड रेल कॉरिडोर के जरिये छात्रों व युवा पेशेवरों को तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक यात्रा का लाभ भी मिलेगा।
और रेलवे आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है जिससे यात्रा अधिक सुरक्षित व सुविधाजनक होगी।
फिर हाईस्पीड रेल कॉरिडोर से यात्रियों का समय बचेगा जिससे कनेक्टिविटी और भी बेहतर होगी।
इसके अलावा कॉरिडोर बनने से मुंबई से पुणे, पुणे-हैदराबाद, हैदराबाद-बेंगलुरु, हैदराबाद-चेन्नई, चेन्नई-बंगलूरू, दिल्ली-वाराणसी व वाराणसी-सिलीगुड़ी जाने के लिए समय भी कम लगेगा। इससे काफी सहूलियत भी मिलेगी।