न्यूज़लिंक हिंदी, कानपुर। कानपुर में एक महीने में तीन आत्महत्याओं से छात्र-छात्राओं में रोष देखने को मिल रहा है। शुक्रवार को उन्होंने संस्थान परिसर में धरना दिया और आईआईटी की शिक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग की। ग्रेडिंग व्यवस्था और टर्मिनेशन पर भी सवाल उठाए। देर रात छात्रों ने कैंपस में कैंडल मार्च भी निकाला।

आपको बता दे कि आईआईटी कानपुर में शुक्रवार को पीएचडी छात्रा प्रियंका जायसवाल ने आत्महत्या कर ली थी। यह संस्थान में नौ दिन में दूसरी और महीने भर में तीसरी आत्महत्या है। प्रियंका की खुदकुशी नें छात्रों को उद्वेलित कर दिया। वे शुक्रवार को एल-20 ग्राउंड में दोपहर 12 बजे धरने पर बैठ गए और प्रदर्शन भी किया।
छात्र, बोले कि वे लगातार हो रहीं आत्महत्याओं से व्यथित हैं। संस्थान को छात्रों के मन से टर्मिनेशन का डर निकालना होगा, तभी वे पढ़ाई पर फोकस कर सकेंगे। इससे आत्महत्या की घटनाएं भी रुकेंगी। धरने के दौरान छात्रों की मेंटल हेल्थ और उनकी मांगों पर बात की गई।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने मौजूदा संकाय फीडबैक प्रणाली में व्यापक बदलाव की वकालत की। उन्होंने “आपसी जवाबदेही, एसआरएस पद्धति के निहितार्थों में पारदर्शिता और छात्र विश्वास के लिए बेहतर संचार” की आवश्यकता पर जोर दिया। इसके साथ ही छात्रों ने आईआईटी कानपुर डॉक्टोरल मॉनिटरिंग कमेटी के आधार पर एक ‘मास्टर मॉनिटरिंग कमेटी’ (एमएमसी) के निर्माण का प्रस्ताव रखा।
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अपनी मांगों की सूची में, छात्रों ने आईआईटी कानपुर प्रशासन से अनिवार्य भागीदारी के साथ प्रति सेमेस्टर दो बार बाहरी संगठनों के माध्यम से संकाय संवेदीकरण सत्र आयोजित करने का आग्रह किया।
विरोध प्रदर्शन का निर्णय आईआईटी कानपुर के छात्रों की सीनेट की एक आपात बैठक के दौरान किया गया, जो हाल ही में 30 दिनों के अंदर तीन छात्रों की आत्महत्या से प्रेरित था। सीनेट ने छात्र निकाय को “परिसर में छात्रों की भलाई और सर्वांगीण कल्याण के सभी पहलुओं पर समग्र चर्चा” पर ध्यान केंद्रित करने का निर्देश दिया।
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